इंदौर  एक तरफ़ जहाँ निकट आते चुनाव का हवाला देकर नंदू चौहान से लेकर विधायक उषा ठाकुर संगठन के काम से मुक्ति पाने के लिए छटपटा रहे हैं वहीं कैलाश विजयवर्गीय हैं जो प बंगाल के दायित्व के बाद, अब मप्र चुनाव समिति में मिली ज़िम्मेदारी के बाद भी चुनाव लड़ने और जीतने के आत्मविश्वास से लबरेज़ हैं। उनका कहना है मेरे पास बेटा आकाश है जो मेरे क्षेत्र में सतत संपर्क में रहता है। उन लोगों के पास आकाश जैसा बेटा नहीं है। क्या पत्नी आशा और बेटे आकाश के लिए टिकट मांगेंगे? उनका कहना था, मैं क्यों माँगू, यह तो पार्टी को सोचना है। 

कांग्रेस को एकजुट करने के लिए दिग्विजय सिंह द्वारा किए जा रहे प्रयास पर उनका कहना था नर्मदा परिक्रमा के साथ ही उन्होंने कुछ अन्य कारणों से पार्टी को यह बताने की कोशिश कर ली है कि वे अभी भी जवान हैं। रही बात एकजुटता की तो पिछले चुनावों के दौरान भी नेताओं के एकदूसरे का हाथ पकड़े ख़ूब फोटो छपते रहे हैं।कांग्रेस तो नारंगी के समान हो गई है जब तक उसका छिलका नहीं उतरे, एक दिखती है। छिलका उतरते ही अलग अलग गुटों वाली फाँक दिखती है। कितने भी प्रयास कर लें सरकार भाजपा की ही बनेगी। 

अब मैं मप्र में अधिक समय दूँगा क्योंकि चुनाव नज़दीक हैं। अमित शाहजी ने भी निर्देश दिए हैं। पार्टी अब इलेक्शन मोड पर है। अभी भोपाल में रामलाल जी के साथ हम सब की बैठक हुई है, डेढ़ महीने का रोड मेप तैयार किया है।संगठन की गाड़ी का ड्राइवर ठीक नहीं था,कैलाश जोशी जी के इस कथन पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता।यह कहना ठीक नहीं कि नंदू भैया के कारण उपचुनावों में हारे, दरअसल वो सब कांग्रेस की परंपरागत सीटें रही हैं। हमारा तो उन सब जगहों पर वोट प्रतिशत बढ़ा है।अधिकारियों में भारत-पाक जैसी स्थित पर सीएम ही बता सकते हैं उन्होंने ऐसा क्यों कहा।

आंबेडकर जयंती पर महू में लाखों के मुक़ाबले मात्र बीस हजार लोगों के आने पर उनका कहना था महाराष्ट्र से लोग नहीं आ पाए क्योंकि दो अप्रैल के बंद और हिंसक घटनाओं का भय बना रहा। एक जून से यदि मप्र में किसान फिर दूध, सब्ज़ी, अनाज आदि की सप्लाय बंद कर रहे हैं तो यह सब विपक्ष की नकारात्मक राजनीति को दर्शाता है। बंगाल में, उप्र में जिस तरह के विरोधी दलों के गठबंधन हो रहे है वह सबूत है कि सत्ता हाथ से जाने की कैसी छटपटाहट है। यह सब भाजपा की बाढ़ को रोकने के प्रयास हो रहे हैं।

इंदौर को शर्मसार कर देने वाली घटना पर उनका कहना था मैंने यूपी में न्यूज सुनते वक्त जब इंदौर का नाम और घटना सुनी तो पीड़ा हुई।अधिकारियों से जानकारी ली। कांग्रेस क्यों विरोध कर रही है। ये हम सब की ज़िम्मेदारी है कि समाज में नैतिकता की गिरावट पर मिल बैठकर सोचें।