क्या विज्ञान के इस युग में यह संभव है कि किसी पत्थर की प्रतिमा का आकार बढ़ता हो. दक्षिण भारत में दावा किया जाता है कि गणपति की एक ऐसी प्रतिमा है, जिसका आकार अपने आप बढ़ता है. इसके साथ ही लोग यह भी कहते हैं कि उस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण मौजूद हैं. 

सबसे पहले घने जंगल के बीच करीब 4000 फ़ीट की ऊंचाई पर पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से गुजरकर आज भी मौजूद हैं. वहीं दूसरी कहानी है भगवान गणेश के उस रूप की. जिसका आकार हर दिन बढ़ता है. जिनके वस्त्र और आभूषण अपने आप छोटे होते जाते हैं. भगवान गणेश का एक ऐसा रूप भी है, जिसकी करिश्माई शक्ति के आगे झूठ बोलने वाला शख्स चंद पलों में पकड़ा जाता है.


भगवान गणेश के अद्भुत चमत्कार की पड़ताल करेगा. टीम ने फैसला किया, जंगल को पार करके उस पहाड़ पर जाने का, जहां गणेश विराजमान हैं. जी हां, छत्तीसगढ़ के जंगलों में एक ऐसा धाम है, जहां विनायक के एकदंत होने का रहस्य छुपा है. लोगों की मान्यता है कि उस जगह पर परशुराम और गजानन में कई दिन तक भयंकर युद्ध छिड़ा था. लेकिन भगवान गणेश के उस धाम तक पहुंचना कोई हंसी खेल नहीं है.गणेश का यह धाम इंसानी बस्ती से कोसों दूर समुद्र तल से करीब 4000 फीट ऊपर है. वहां जाना मौत को दावत देने के बराबर है. गणेश पुराण से पता चला कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में एक ऐसा मंदिर है, जो ढोलकल नाम के पहाड़ की चोटी पर है.

इसी जानकारी के आधार पर टीम निकल पड़ी दिल्ली से करीब 1600 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा जिले की ओर. गणेश पुराण में इस बात का भी जिक्र है कि उस अद्भुत मंदिर में न छतें हैं और न ही दीवार. विनायक का वो खुला दरबार है, जो पूरी तरह प्राकृतिक वातावरण में है. सफर के दौरान टीम को लंबोदर की लीला के बारे में पता चला, जो उनके एकदंत होने से जुड़ी है.

लोगों ने बताया कि एक बार महर्षि परशुराम महादेव से मिलने कैलाश पर्वत पहुंचे. शिवशंकर कैलाश पर नहीं थे. इसके बाद परशुराम उन्हें ढूंढते हुए पार्वती के घर पहुंचे, जहां घर के बाहर गणेश पहरा दे रहे थे. परशुराम ने गणेश को देखते हुए कहा कि हे विचित्र प्राणी कौन है. मेरे मार्ग से हट जा, मैं अपने आराध्य का दर्शन करने आया हूं, लेकिन गणेश ने परशुराम को अंदर जाने से रोक दिया. लेकिन गणेश नहीं माने. दोनों के बीच बात बढ़ती चली गई, फिर परशुराम और गणेश में युद्ध छिड़ गया.

परशुराम गणेश पर वार करते रहे लेकिन इस युद्ध में गजानन परशुराम पर भारी पड़ने लगे. अंत में परेशान होकर परशुराम ने गणेश पर अपने फरसे से वार किया. फरसे के वार से गणेश का एक दांत टूट गया और इस तरह गणेश एकदंत हो गए. लोग बताते हैं कि गणेश का दांत टूटकर छत्तीसगढ़ की उसी धरती पर गिरा, जहां आज यह मंदिर है.


मंदिर के रास्ते में पड़ता है फरसपाल गांव. कहा जाता है कि फरसपाल गांव का गणेश मंदिर से गहरा नाता है. पुराणों में भी बताया गया है कि गणेश के साथ युद्ध में परशुराम का फरसा यहीं पर गिरा था, जिसके कारण इस गांव का नाम फरसपाल पड़ा. इस गांव से आगे बढ़ती हुई टीम जंगल की ओर निकली है. दंडकारण्य में भगवान गणेश के उस मंदिर तक पहुंचने में जानवरों के अलावा नक्सलियों से भी खतरा है लेकिन रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए टीम कोई भी खतरा उठाने को तैयार थी.