मोस्टा मानो मंदिर में मौजूद भक्तों ने बताया कि सबने उस पत्थर को उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो पाया. इसके साथ ही लोगों ने ये भी कहा कि जो सच्चे मन से मोस्टा देवता के दरबार में आता है, वो इस पत्थर को आसानी से उठा लेता है. टीम के सदस्यों ने भी पत्थर को उठाने की कोशिश की, लेकिन सभी असफल रहे. इससे यह तो साबित हो गया कि पत्थर वाकई भारी है और इसे घुटने तक उठाना भी बड़ा मुश्किल का काम है. अब दावे से जुड़े दूसरे पहलू के पड़ताल का वक्त आ गया था.


मंदिर के पुजारी ने बताया कि अगर कोई पहलवान भी आता है तो इस पत्थर को नहीं उठा पाता है, वहीं दूसरी तरफ एक दुबला-पतला आदमी भी इसे आसानी से उठा लेता है. पुजारी ने बताया कि अकेला आदमी इसे तभी उठा सकता है, जब उस आदमी के भीतर ऐसा करने की हिम्मती हो या फिर वो भाग्यवान हो, क्योंकि इस पत्थर को उठाने के बाद उसकी किस्मत बदल जाती है. इसके साथ ही पुजारी ने एक और बात बताई कि अगर 9 लोग मिलकर एक खास ऊगंली से उठाने की कोशिश करें तो भी यह उठ जाता है.


इस बात को जानने के बाद टीम के 9 सदस्य मिलकर एक-एक ऊंगली के सहारे पत्थर उठाने की कोशिश करने लगे. टीम के 9 सदस्यों ने पत्थर के नीचे अपनी ऊंगलियां लगा दीं और पत्थर को उठाने की कोशिश करने लगे. टीम पहले प्रयास में विफल रही, लेकिन वहां मौजूद लोगों के कहने दोबारा कोशिश की गई. दूसरी बार वाकई में 18 ऊंगलियों के दम पर 80 किलो से ज्यादा भारी पत्थर सीने की ऊंचाई तक उठ गया. टीम के सभी सदस्य हैरत में थे कि जो पत्थर पूरे बाजूओं की ताकत से नहीं उठ पा रहा था, उसे 9 लोगों ने मिलकर ऊंगलियों के सहारे कैसे उठा लिया.


इस पहेली को सुलझाने के लिए टीम ने दिल्ली में एक तर्कशास्त्री से मुलाकात की. जिन्होंने बताया कि ये कोई चमत्कार नहीं बल्कि फिजिक्स के एक फॉर्मूले का असर है. तर्क शास्त्री ने बताया कि 9 लोगों ने 18 ऊंगलियों पर 90 किलो के हिसाब से 5 किलो का भार आया. कोई भी 5 किलो का डब्बा आराम से उठा सकता है.इसमें कोई चमत्कार नहीं है, पत्थर का वजन एक फोर्स है और जब फोर्स को आपने बांट दिया तो एक बात ध्यान देना होगा कि सबको एक साथ उठाना होगा. यानी विज्ञान के मुताबिक 18 ऊंगलियों पर 90 किलो का पत्थर उठाना कोई चमत्कार नहीं बल्कि भौतिक विज्ञान के बल के समान वितरण का सिद्धांत है. इस बात को


इसे साबित करने के लिए टीम के सामने 80 किलो के वजन को 12 ऊंगलियों की मदद से ठीक वैसे ही उठाया गया, जैसे मोस्टा मानो मंदिर में उस पत्थर को उठाया गया था. मंदिर में करीब 90 किलो के वजनी पत्थर को 9 लोगों ने अपनी 2-2 यानी कुल 18 ऊगंलियों से उठाया था और दिल्ली में 80 किलो के वजन को महज 12 ऊंगलियों से 6 लोगों ने आसानी उठा लिया. इस तरह चमत्कार की सारी हकीकत टीम के सामने थी.