नई दिल्ली : पिछले पांच सालों में भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश बन गया है. लेकिन पिछले दिनों चावल के एक्सपोर्ट में गिरावट आई है क्योंकि, कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल से भारत के चावल की क्वालिटी खराब होती जा रही है. इसलिए चावल एक्सपोर्ट में गिरावट भी दर्ज हुई है. लेकिन अब शायद इन हालातों में सुधार हो सकता है. एनपीएल चावल की गुणवत्ता बरकरार रहे इस पर काम कर रहा है.

कृषि और प्रंसस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान बासमती चावल के निर्यात में सात फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है. 

हालांकि एपीडा गिरावट के इन आंकड़ों को मानने से इंकार कर रहा है. बासमती एक्सपोर्ट डवलपमेंट फाउंडेशन (BEDF) के डायरेक्टर एके गुप्ता ने बताया कि चावल निर्यात से पहले प्रयोगशाला में चावल की जांच हो, यह जरूरी नहीं है. हां, चावल में पेस्टीसाइड जरूर होता हैं और इसमें एपीडा कुछ नहीं कर सकता. क्योंकि, इसके पीछे एक बड़ा तंत्र काम करता है. उन्होंने बताया कि उन्होंने कीटनाशक का इस्तेमाल कैसे हो इस के लिए एक गाइडलाइन लाने का प्रस्ताव कृषि मंत्रालय को भेजा है. 

40 लाख टन बासमती चावल का होता है निर्यात
भारत से लगभग 40 लाख टन बासमती चावल निर्यात होता है जबकि देश में 20 लाख टन चावल की खपत है. लेकिन जहरीले कीटनाशकों के प्रयोग के कारण निर्यात में लगातार कमी दर्ज की जा रही है. एपीडा के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले तीन महीनों में बासमती चावल का निर्यात घटकर 11.69 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 12.58 लाख टन का हुआ था. 

पिछले दो साल में चावल एक्सपोर्ट में गिरावट आई है. यूरोप, अमेरिका, सऊदी अरब में चावल के ज्यादा कंसाइनमेंट कैंसल होते दिख रहे हैं. 

दरअसल, भारत में चावल की पैदावर के दौरान अधिक मात्रा में कीटनाशक और अन्य केमिकल टॉक्सिक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे चावल की गुणवत्ता पर असर हो रहा है. विदेश में जब भारत से चावल जा रहे हैं तो उनमें पेस्टिसाइड और दूसरे केमिकल अधिक मात्रा में पाए जा रहे हैं. इसलिए ज्यादातर कंसाइनमेंट शिपमेंट के दौरान ही रद्द हो जाते हैं. इस साल चावल एक्सपोर्ट में 10-15 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है. जबकि भारत चावल के निर्यात में अव्वल नंबर पर आता है.

ऑल इंडिया राइस एक्पोटर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत से हर साल 50 लाख मैट्रिक टन चावल विदेशों में निर्यात किया जाता है. ऐसे में अगर कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल के कारण चावल निर्यात नहीं होगा तो 18 से लेकर 20 लाख किसानों पर इसका सीधा असर पड़ेगा. इसी को देखते हुए भारत में निर्यात के सबसे बड़े सरकारी संगठन एपीडा ने किसानों को कम से कम कीटनाशकों के इस्तेमाल की सलाह देते हुए एडवाइजरी जारी की है.