ढाका: बांग्लादेश में 23 दिसंबर को आम चुनाव होंगे और देश में पहली बार सीमित स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का इस्तेमाल किया जाएगा. चुनाव आयोग ने सरकार और मुख्य विपक्षी गठबंधन के मध्य चुनाव के समय को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच गुरुवार को संसदीय चुनाव की तारीख का ऐलान किया.

मुख्य चुनाव आयुक्त नूर-उल-हुदा ने टीवी पर प्रसारित एक संबोधन में कहा, ‘समूचे बांगलादेश में 11वां आम चुनाव 23 दिसंबर को होगा.’ हुदा ने चुनाव की तारीख को अंतिम रूप देने के लिए चार चुनाव आयुक्तों के साथ बैठक की थी, जिसके कुछ घंटों बाद हुदा ने मतदान की तिथि का ऐलान किया.

नव निर्मित नेशनल यूनिटी फ्रंट (एनयूएफ) चुनाव की तारीख को टालने की मांग कर रहा है जबकि सत्ताधारी अवामी लीग ने आयोग से अनुरोध किया था कि वह अपनी योजना पर कायम रहे.
10.42 करोड़ लोग मतदाता के तौर पर पंजीकृत
उम्मीदवार नौ से 19 नवंबर के बीच अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं. 22 नवंबर को नामांकनों की जांच की जाएगी.  बांग्लादेश में तकरीबन 5.16 करोड़ महिलाओं समेत 10.42 करोड़ लोग मतदाता के तौर पर पंजीकृत हैं. वे लगभग 40,199 मतदान केंद्रों के माध्यम से मत पत्रों के जरिए 300 संसदीय प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे.

हुदा ने सीमित स्तर पर ईवीएम के इस्तेमाल का भी ऐलान किया. उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि अगर ईवीएम का इस्तेमाल किया जाता है तो यह मतदान गुणवत्ता की प्रक्रिया में सुधार लाएगा और वक्त, धन और मेहनत को बचाएगा.  बीडी न्यूज 24.कॉम ने खबर दी है कि ईवीएम का इस्तेमाल आंशिक तौर पर स्थानीय सरकार के चुनाव में किया गया था.

कई सियासी पार्टियों की ओर से ईवीएम के इस्तेमाल पर ऐतराज जताने के बावजूद पिछले महीने जन प्रतिनिधि आदेश में संशोधन के बाद इनके इस्तेमाल को संभव बनाया गया.

आयोग 150,000 मशीनों का इस्तेमाल करेगा
ढाका ट्रिब्यून ने खबर दी है चुनाव आयोग की योजना रैन्डम्ली चयनित कम से कम 100 सीटों पर ईवीएम इस्तेमाल करने की योजना है. आयोग 150,000 मशीनों का इस्तेमाल करेगा. विपक्षी पार्टियों ने चुनाव के लोकतांत्रिक नहीं होने का अंदेशा जताया है और प्रदर्शनों की धमकी दी है.

विपक्ष की नेता और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख खालिदा जिया को चुनाव का ऐलान करने से कुछ घंटे पहले ही वापस जेल भेज दिया गया. उनका एक महीने से अस्पताल में इलाज चल रहा था. जिया के चुनाव नहीं लड़ने के आसार हैं और वह भ्रष्टाचार के मामले में जेल में है और उनके पास अपील का वक्त नहीं है.

उनकी बीएनपी ने 2014 का चुनाव बहिष्कार किया था क्योंकि उसे डर था कि चुनाव में धांधली की जा सकती है.  हुदा ने सभी सियासी पार्टियों से चुनाव में हिस्सा लेने की गुजारिश की है ताकि बांग्लादेश के विकास के प्रयासों को जारी रखा जा सके और लोकतंत्र को और मजबूत किया जा सके.