बिलासपुर । शिक्षा और रोजगार से थर्ड जेंडर समुदाय समाज में स्वीकार्यता होगा। मां बाप थर्ड जेंडर वाले बच्चे का विरोध नहीं करेंगे और समाज में कोई समस्या नहीं होगी। डॉ.संजय क.े अलंग ने आज किन्नर समुदाय के सम्मेलन में यह विचार व्यक्त किया। किन्नर समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने थर्ड जेंडर समुदाय के समावेशन का निर्णय लिया। जिसके तहत सबसे पहले शिक्षा में समावेशन हुआ। सभी बच्चे साथ में पढ़े तो थर्ड जेंडर का कोई मुद्दा ही नही रहेगा। उनकी पृथक पहचान स्थापित होने से वे समाज से नहीं जुड़ पायेंगे। समाज के बच्चे जहां पढ़ते हैं वहीं थर्ड जेंडर बच्चे भी पढ़ें। शिक्षा में समावेशन के लिये पृथक व्यवस्था की गई। जिससे उनका स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित हो सके। अब स्कूल में प्रवेश या नौकरी के लिये फार्म में थर्ड जेंडर लिखा जा सकता है। निर्वाचन की प्रक्रिया में भी थर्ड जेंडर को सामान्य व्यक्ति के साथ रखा गया है। रोजगार के समावेशन के लिये स्कील डेवलपमेंट हेतु अवसर उन्हें उपलब्ध कराये गये हैं। कलेक्टर ने कहा कि जिस दिन थर्ड जेंडर के बच्चे दरोगा या कलेक्टर बनेंगे उस दिन क्रांति आयेगी। उन्होंने कहा कि ये बच्चे ग्रेजुएट हों और प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हों, साथ ही स्कील इंडिया कार्यक्रम से भी जुड़ें। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों द्वारा थर्ड जेंडर को रोजगार देने के लिये कार्य चिन्हित किये गये हैं। कार्यक्रम में उपस्थित बिलासपुर के विधायक शैलेष पाण्डेय ने कहा कि ऋषि मुनियों ने वेद और पुराणों में किन्नरों को सामान्य मानव से श्रेष्ठ बताया है। सरकार द्वारा उनके सामाजिक स्वीकार्यता के लिये उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। वे भी सामान्य लोगों की तरह जीवन बितायें सरकार की यह मंशा है। उन्होंने थर्ड जेंडर समुदायों के लिये सामुदायिक भवन निर्माण हेतु हर संभव सहयोग करने की बात कही। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक श्री खलखो सहित थर्ड जेंडर समुदाय तथा समाज के अन्य वर्ग के लोग उपस्थित थे।