मुंबई । फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म पर नवोदित बॉलीवुड अभिनेत्री सहर बांबा का कहना है, 'मैं गलत हूं कि अगर यह कहूंगी कि इंडस्ट्री में नेपोटिज्म नहीं है। मैं इससे इनकार नहीं कर सकती। साथ ही मैं भी यह मानती हूं कि आपको इस चीज को लेकर बैठना नहीं चाहिए आपको एक्सेप्ट करना चाहिए जो है और अपनी मेहनत पर यकीन होना चाहिए। इस फिल्म से जुड़ने से पहले मैंने कई बार इन सब चीजों का सामना किया है। लेकिन सेट पर कहीं पर भी मुझे एहसास नहीं हुआ कि मैं आउटसाइडर हूं। हमें बराबर का ट्रीटमेंट मिला करता था। इसलिए मैं कंप्लेन नहीं कर सकती। उल्टा सनी सर कई बार हमारे साथ बैठकर फिल्म इंडस्ट्री की बहुत सारी इंटरेस्टिंग बातें शेयर किया करते थे अपने एक्सपीरियंस शेयर करते थे, जो मेरे लिए प्रेरणादायक था।' यहां बता दे कि फिल्म 'पल पल दिल के पास' से अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत करने जा रहीं सहर बांबा अपने डेब्यू को लेकर खासी उत्साहित हैं। शिमला के एक छोटे कस्बे से ताल्लुक रखने वाली सहर मानती है उनके लिए 'पल पल दिल के पास' से उनका डेब्यू करना किसी सपने के जैसा है। पिछले 4 साल से मुंबई में ऐक्टिंग के फील्ड में अपना करियर तलाश रहीं सहर की जिंदगी उस वक्त बदल गई, जब उन्हें टाइम्स के फ्रेश फेस के टाइटल से नवाजा गया।सहर के अनुसार, 'बारहवीं के बाद ही मैं मुंबई आ गई थी और यहां पढ़ाई के साथ-साथ ऐक्टिंग के लिए भी ट्राई कर रही थी। इस दौरान मैंने बहुत से ऑडिशंस दिए लेकिन कहीं बात नहीं बन पा रही थी। इसी बीच मैंने टाइम्स फ्रेश फेस के लिए फॉर्म भरा। मैं इसे ही अपनी लाइफ का टर्निंग प्वाइंट मानती हूं क्योंकि खिताब जीतने के बाद मुझे कई कास्टिंग डायरेक्टर्स के कॉल आने लगे।' पल पल के साथ जुड़ने पर सहर कहती हैं, 'मुझे यकीन नहीं होता कि मैं सनी देओल सर के साथ काम कर रही हूं। मैंने तो ऑडिशन के दौरान ही हार मान ली थी मुझे लगा था मेरा सिलेक्शन नहीं होगा। ‌उस दिन मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा सब सनी सर ने मुझे बुलाकर कहा कि वेलकम, अब आप हमारे साथ हैं। एक न्यूकमर के लिए इससे अच्छी बात क्या हो सकती है कि उन्हें सनी देओल के डायरेक्शन में काम करने का मौका मिले।' शूटिंग से जुड़े अपने एक्सपीरियंस थे सहर कहती हैं, 'शूटिंग के ज्यादातर लोकेशंस काफी रियल है। हम पहाड़ों पर चढ़कर सुबह के 4 बजे शूटिंग करने जाया करते थे। रस्सी से लटकना, पानी में कूदना यह सब काफी टफ एक्सपीरियंस रहा है। इस दौरान एक बात बहुत अच्छी थी सनी सर मुझे बिल्कुल अपने बच्चे की तरह ट्रीट कर रहे थे। उन्होंने मुझमें और करण में कोई अंतर नहीं समझा।'