मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा है कि गांधीजी के विचार, उनके दर्शन और सिद्धांतों को घर-घर तक पहुँचाना है। हमारा मूल लक्ष्य यह होना चाहिए कि युवा पीढ़ी गांधीजी के व्यक्तित्व और कृतित्व को जाने और उसे अपनाए। श्री कमल नाथ आज मंत्रालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150वें जन्म वर्ष पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आयोजित गतिविधियों के लिए गठित समिति को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि गांधीजी के विचार और उनकी प्रासंगिकता हमारे देश में सदैव रही है, आज भी है और आगे भी रहेगी। उन्होंने कहा कि जिस दौर से आज भारत गुजर रहा है, उसमें यह सबसे ज्यादा जरूरी है कि हम गांधीजी के सिद्धांतों और उनके द्वारा स्थापित मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाये, उसे लोग अपनाएँ, यह भी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से हम किसी एक वर्ष में गांधीजी को समेट नहीं सकते बल्कि हमारे प्रयास सदैव गांधीजी को लोगों तक पहुँचाने के होंगे। इसके लिए स्थायी कार्यक्रम बनाने होंगे। उन्होंने कहा कि गाँधीजी की 150वीं जयंती पर हमारी सारी गतिविधियाँ केवल टी.वी. पर दिखाने और अखबारों में छपने तक सीमित न रहें। युवा पीढ़ी तक उनके विचार और आज के समय में उनकी प्रासंगिकता पहुँचे, इस पर हमें विशेष ध्यान देना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की बैठक में गांधीजी के विचारों का क्रियान्वयन कैसे हो, इसका एक समग्र प्रारूप तैयार किया जाये। अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में पुन: एक बैठक की जाएगी, जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दर्शन और सर्वधर्म समभाव, धर्म-निरपेक्षता और राष्ट्रीय एकता के लिए उनके जो विशेष आग्रह थे, उस पर एक स्थायी कार्यक्रम के संचालन की रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी। उस रूपरेखा के आधार पर हम मध्यप्रदेश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लोगों तक पहुँचाने का काम करेंगे।
आज के दौर में महात्मा गांधी के विचार और सिद्धांत की सबसे ज्यादा जरूरत
बैठक में समिति के सदस्यों ने गांधीजी द्वारा सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्र की एकता, सभी वर्गों के कल्याण और धर्म के प्रति उनके विचारों, उनके दर्शन, सिद्धांतों और मूल्यों को शहरों से लेकर गाँव तक कैसे पहुँचाये, इसके बारे में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि आज के दौर में महात्मा गांधी के विचार और सिद्धांत की सबसे ज्यादा जरूरत है।
पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने गांधीजी के 150वें जयंती वर्ष में आजादी की लड़ाई में उनके द्वारा अपनाए गए प्रमुख शस्त्र, जिनसे उन्होंने युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों, दलितों में नई चेतना जागृत की और खादी को लेकर उनके दर्शन, को जन-जन तक पहुँचाने का सुझाव दिया। उन्होंने बैतूल जिले में हुए जंगल सत्याग्रह को केन्द्रित करते हुए वन क्षेत्रों में पदयात्रा निकालने, ग्राम स्वराज्य की अवधारणा पर ग्रामीण क्षेत्रों में पदयात्रा निकालने, महात्मा गांधीजी के नाम पर पाठशाला का नामकरण करने और सरकार के सभी पत्राचारों और विज्ञापन में गांधीजी की 150वीं जयंती का लोगो तथा उनकी सूक्तियाँ अंकित करने का सुझाव दिया। समाज में कटुता फैलाने वाले लोगों को प्रतिबंधित करने, स्कूलों में प्रार्थना में रामधुन और गांधीजी की सुप्रसिद्ध प्रार्थना 'ईश्वर अल्लाह तेरे नाम-सबको सन्मति दे भगवान', सभी सरकारी कार्यक्रमों में गांधीजी की प्रार्थना तथा खादी के उत्पादन को विशेष प्रोत्साहन देने का सुझाव दिया। उन्होंने गांधीजी के नशामुक्ति संबंधी विचारों के आधार पर युवाओं को नशे से मुक्त करने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा। श्री सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी गांधीजी के विचारों को प्रचारित करने तथा हाई-स्कूल पाठ्यक्रम की पुस्तकों में गांधीजी का पाठ शामिल करने को कहा।
महाराष्ट्र के वर्धा से आये श्री सुमन बरंत ने कहा कि पर्यावरण को लेकर गांधीजी का विशेष आग्रह रहा है। इस विषय पर हमें युवाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित करना चाहिए। उन्होंने चरखा पर प्रबोधन कार्यक्रम और गांधीजी पर केन्द्रित पोर्टेबल प्रदर्शनी लगाने का सुझाव दिया। श्री बरंत ने कहा कि भागवत कीर्तन के जरिए भी हम गांधीजी को जन-जन तक पहुँचा सकते हैं। उन्होंने गांधीजी के विचारों और उन पर लिखे जाने वाले नए साहित्य को सामान्य भाषा में लिखकर लोगों तक पहुँचाने को कहा। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में गांधीजी पर केन्द्रित पाँच दिवसीय कार्यक्रम हों और आदिवासी क्षेत्रों में भी गांधीजी से संबंधित आयोजन किये जाये।
गांधीवादी चिंतक डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ने मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ को बधाई दी कि उन्होंने मध्यप्रदेश में महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष में बड़े पैमाने पर कार्यक्रम करने का निर्णय लिया है। डॉ. सुब्बाराव ने सुझाव दिया कि सबसे पहले हमें सांप्रदायिक सद्भाव और देश की अखंडता को मजबूत बनाने वाले कार्यक्रम करना चाहिए। उन्होंने गांधीजी के विचारों को आत्म-सात कर निष्ठावान कार्यकर्ताओं का निर्माण करने और धर्म तथा भाषा में एकता तथा भूख, गरीबी, बेगारी, भ्रष्टाचार और छूआछूत मुक्त भारत बनाने संबंधी प्रयासों को कार्यक्रम में जोड़ने का सुझाव दिया।
पूर्व महाधिवक्ता और गांधीवादी श्री आनंदमोहन माथुर ने सभी सरकारी स्कूलों में 1857 से 1947 तक हुए स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले महापुरुषों पर केन्द्रित लघु पुस्तिकाएँ बाँटने को कहा। उन्होंने स्कूल-कॉलेजों में गांधीजी के जीवन पर केन्द्रित निबंध प्रतियोगिता के आयोजन, संग्रहालय, शोध संस्थान की स्थापना स्थापित करने और विद्यालयों तथा महाविद्यालयों में उदार विचार वाले क्रांतिकारी वक्ताओं के व्याख्यान आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने स्कूली तथा महाविद्यालयीन शिक्षा में महापुरुषों पर केन्द्रित पाठ पाठ्यक्रम में शामिल करने तथा महापुरुषों के स्मारकों का जीर्णोद्धार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मध्यकालीन इतिहास को लेकर जो भ्रांतियाँ फैलायी गई हैं, उससे युवा पीढ़ी को अवगत कराने के लिए भी कार्यक्रम करने होंगे। उन्होंने हर 6 गाँव के बीच स्वास्थ्य केन्द्र खोलने और उनमें भारतीय चिकित्सा पद्धति से इलाज करवाने की सुविधा उपलब्ध करवाने, स्कूलों में सभी भाषाएँ पढ़ाने और पुस्तकालय बनाने का सुझाव दिया।
गांधीवादी नेता श्री पी. राजगोपाल ने शांति और अहिंसा का मंत्रालय गठित करने, सर्वोदय संगठनों को मजबूत बनाने और शांति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यह वर्ष कस्तूबा गांधीजी का भी 150वां जन्म वर्ष है। इसलिये हमें महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें भूमि अधिकार देने और गाँवों को भूमि विवाद से मुक्त कराने की मुहिम भी चलाना चाहिए।
श्री चंद्रिकाप्रसाद द्विवेदी ने बड़वानी जिले में डूब में आये गांधीजी के स्मारक को अन्य स्थान पर भव्य रूप में स्थापित करने, वास्तविक रूप में ग्राम-स्वराज्य को लागू तथा युवा पीढ़ी को भ्रमित करने वाले इतिहास तथा प्रदूषित विचारधारा से मुक्त करने का अभियान चलाने का सुझाव दिया।
श्री एल.एस. हरदेनिया ने गांधीजी के शिक्षा, संस्कृति, महिलाओं और विश्व-शांति को लेकर जो विचार हैं, उन्हें हर पंचायत तक पहुँचाने और गांधीजी पर केन्द्रित फिल्में स्कूलों में दिखाने तथा गांधीजी के प्रति पूरे विश्व के जिन महापुरुषों ने विचार व्यक्त किए हैं, उनसे बच्चों और युवाओं को अवगत कराने का सुझाव दिया।
श्री करुणाकर त्रिवेदी ने नागरिकों को गांधीजी के विचार, व्यवहार और मूल्यों से अवगत कराने, खादी के महत्व को पुन:स्थापित करने और गांधीजी के विचारों को लेकर जो संस्थान काम कर रहे हैं, उन्हें सशक्त बनाने को कहा। श्री चिन्मय मिश्रा ने गांधीजी के विचारों के साथ काम करने वाले व्यक्तियों को रेखांकित करने को कहा। गांधीजी के विचारों पर केन्द्रित सांस्कृतिक उत्सव आयोजित करने और जो कानून दमनकारी हों, उन्हें नरम बनाने या समाप्त करने का सुझाव दिया। श्री घनश्याम सक्सेना ने गांधीजी के जंगल सत्याग्रह को प्रचारित करने और धर्म-निरपेक्षता को मजबूत बनाने के संबंध में सुझाव दिए।
सुश्री मीनाक्षी नटराजन ने एनएसएस के राष्ट्रीय एकता शिविर लगाने, विश्वविद्यालय में गांधी अध्ययन केन्द्र खोलने और फैलोशिप स्थापित करने को कहा। सुश्री नटराजन ने संविधान पर केन्द्रित पुस्तक के प्रकाशन और बच्चों तथा युवाओं को उससे अवगत कराने का सुझाव दिया। प्रारंभ में प्रमुख सचिव संस्कृति श्री पंकज राग ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी 150वीं जयंती पर प्रस्तावित कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
बैठक में संस्कृति मंत्री डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ, सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह, जनसम्पर्क मंत्री श्री पी.सी. शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, ग्रामोद्योग मंत्री श्री हर्ष यादव एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल उपस्थित थे। बैठक में मुख्य सचिव एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।