इन्दौर । गीत-संगीत की महफिलों में सदाबहार नग़मे सुनने को मिल जाये तो दिल सुकून महसूस करने लगता है। फिर मौसम का मिजाज़ खुशगवार हो जाये तो सोने पर सुहागा हो जाता है। संगीत संस्था वेव्ज़ ऑफ म्यूजिक ग्रुप की मेज़बानी में कार्यक्रम ''धीरे-धीरे प्यार को बढ़ाना है...'' में 30 फिल्मी गीतों से सजी खुशनुमा शाम से रूबरू होने का मौका मिला। प्रीतमलाल दुआ सभागृह पर इस हसीन शाम में वो गीत शामिल किए गए जो गुज़रे ज़माने में मशहूर हुए और जो आज भी गोल्डन हिट्स है। शहनाज़ खान, शाकिर हुसैन, संजय मंडलोई, महेंद्र जैन, आनन्द जोशी, दीपक सोनी और करिश्मा तोंडे ने अपनी दिलकश आवाज़ में खूबसूरत नग़मों से ख़ूब समां बांधा।।संचलान की ज़िम्मेदारी सतीश पांडेय ने बखूबी निभाई।
महफ़िल का बेहतरीन आगाज़ संजय मंडलोई ने मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने से किया। शहनाज़ खान ने आशा भोसले की आवाज़ में फ़िल्म दिल तो पागल है का नग़मा मुझको हुई न खबर, चोरी चोरी छुप छुप कर कब प्यार की पहली नज़र से पूरे माहौल को गुनगुनाने पर मजबूर कर दिया। शहनाज़ खान सुरीली मख़मली आवाज़ के साथ  गाने को पूरे एहसास में डुबोकर सुनाती हैं। शाकिर हुसैन ने कुमार शानू की आवाज़ में एक से बढ़कर एक लाजवाब नग़मे सुनाये। शाकिर हुसैन ने आज हमने दिल का हर किस्सा तमाम कर दिया खुद भी पागल हो गए हमको भी पागल कर दिया सुनाकर महफ़िल को रूमानी कर दिया। वाक़ई शाकिर हुसैन को कुमार शानू की आवाज़ में गाने सुनाने का हक़ है। दीपक सोनी ने मेरे सामने वाली खिड़की में सुनाकर माहौल में मस्ती भर दी। आनन्द जोशी ने प्यार मांगा है तुम्हीं से प्रस्तुत कर महफ़िल को दिलकश बना दिया। करिश्मा तोंडे ने जाने क्यों लोग मोहब्बत करते हैं कि उम्दा प्रस्तुति दी। महेंद्र जैन ने इश्क़ छुपता नहीं छुपाने से की क़ाबिले तारीफ प्रस्तुति दी। आयोजक शहनाज़ ख़ान ने बताया सदाबहार नग़मों की इस सुरीली शाम में  गीतकार आंनद बक्षी, असद भोपाली, समीर, हसरत जयपुरी, मजरूह सुल्तानपुरी, संतोष आनंद के गीत पेश किये गए।  कलाकारों की हौसला अफजाई के लिए सभी को ट्राफी देकर सम्मानित भी किया गया। कुल मिलाकर दिल से सजाई महफ़िल कामयाब रही और आयोजक भी बधाई के हकदार हैं कि उन्होंने संगीत रसिकों को ऐसी सुरीली दावत दी जो लंबे अरसे तक याद रहेगी।