नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उच्चतम न्यायालय में अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन 2020 के उद्घाटन के बाद कहा कि यह देश के 130 करोड़ लोगों के लिए निश्चिंतता की बात है कि तमाम चुनौतियों के बीच भारतीय न्यापालिका ने हर बार अपनी विश्वसनीयता को साबित किया है। उन्होंने कहा कि संविधान के तीनों स्तंभों ने अपनी उचित भूमिका निभाई है। हाल ही में कुछ ऐसे बड़े फैसले आए हैं, जिनको लेकर पूरी दुनिया में चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा फैसले से पहले अनेक तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं, लेकिन हुआ क्या? सभी ने न्यायपालिका द्वारा दिए गए इन फैसलों को पूरी सहमति के साथ स्वीकार किया। 
पीएम मोदी ने कहा कि भारत हजारों वर्षों से भारत इन्हीं मूल्यों को लेकर आगे बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने महात्मा गांधी से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया जब गांधी जी को वकालत का पहला केस मिला था तब उनसे केस के बदले कमीशन मांगा जा रहा था। लेकिन गांधी ने साफ कह दिया था कि केस मिले न मिले वह कमीशन नहीं देंगे। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने 1500 पुराने कानून खत्म कर दिए हैं। पीएम मोदी ने कहा न्यायपालिका में हर देशवासी की आस्था है। उन्होंने कहा हाल में कुछ ऐसे बड़े फैसले आए हैं, जिनको लेकर पूरी दुनिया में चर्चा थी। फैसले से पहले अनेक तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं। लेकिन हुआ क्या? 130 करोड़ भारतीयों ने न्यायपालिका द्वारा दिए गए इन फैसलों को पूरी सहमति से स्वीकार किया। पीएम मोदी ने कहा सरकार की कोशिश है कि देश की हर कोर्ट को ई-कोर्ट इंटीग्रेटेड मिशन मोड प्रोजेक्ट से जोड़ा जाए। 
नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड की स्थापना से भी कोर्ट की प्रक्रियाएं आसान बनेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा मुझे खुशी है कि इस कॉन्फ्रेंस में लैंगिक न्याय को भी उचित महत्व दिया गया है। दुनिया का कोई भी देश, कोई भी समाज लैंगिक न्याय के बिना समानता की परिस्शिति उपलब्ध नहीं करा सकता।  पीएम मोदी ने कहा भारत दुनिया के उन बहुत कम देशों में से है, जिसने स्वतंत्रता के बाद से ही महिलाओं को वोट देने का अधिकार सुनिश्चित किया है। आज 70 साल बाद अब चुनाव में महिलाओं की भागीदारी अपने सर्वोच्च स्तर पर है।
केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने उच्चतम न्यायालय के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवादियों और भ्रष्ट लोगों को निजता का कोई अधिकार नहीं है और ऐसे लोगों को व्यवस्था का दुरुपयोग नहीं करने देना चाहिए। प्रसाद ने कहा कि शासन की जिम्मेदारी निर्वाचित प्रतिनिधियों और निर्णय सुनाने का काम न्यायाधीशों पर पर छोड़ देना चाहिए। कानून मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायपालिका और बदलती दुनिया विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन 2020 में कहा कि लोकलुभावनवाद को कानून के तय सिद्धांतों से ऊपर नहीं होना चाहिए। भारत के प्रधान न्यायाधीश शरद एस बोबडे ने कहा कि भारत विभिन्न संस्कृतियों का समागम है, जिसमें मुगलों,  डच, पुर्तगालियों और अंग्रेजों की संस्कृतियां समाहित हैं। बोबडे ने कहा कि संविधान ने एक मजबूत तथा स्वतंत्र न्यायपालिका का सृजन किया है और हमने इस मूलभूत विशेषता को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रयास किए हैं।