रायपुर. बीते वर्ष रिकार्ड तोड़ 7 तूफानों (Stroms) ने देश-दुनिया के अलग अलग हिस्सों में जमकर तबाही मचाई. अब नए तूफान एमफान के लिए तैयार रहना होगा. क्योंकि 17 और 18 मई को तूफान अपना असर दिखा सकता है. मौसम वैज्ञानिकों (weather scientists) में मुताबिक मौसम का बार-बार परिवर्तन होना और औसत से अधिक बार तूफान आना जलवायु परिवर्तन की ओर इंगित करता है. पिछले एक साल में 7 तूफान और दर्जनों वेस्टन डिस्टर्वेंस हुए, जिसका असर छत्तीसगढ़ के साथ ही पूरे भारत के मौसम पर पड़ा. छत्तीसगढ़ में एमफान तूफान को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. इसका हल्का असर 16 मई की रात को देखने को मिला. 17 और 18 मई को भी छत्तीसगढ़ में इसका आंशिक असर होने की आशंका जाहिर की गई है.बता दें कि एक माह के भीतर 9 वेस्टन डिस्टर्वेंस बने जो आमतौर पर तीन से चार बनते थे. एक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2019 में 1 और 2 नवम्बर, 19, 5 और 6 नवम्बर को, 8 और 10 नवम्बर को 12 और 16 नवम्बर को, 18 और 24 नवम्बर को, 24 और 25 नवम्बर को, 25 और 28, व 28 व 29 नवम्बर को वेस्टन डिस्टर्वेंस हुआ. 3 वेस्टन डिस्टर्वेंस अफगानिस्तान में बना, लेकिन 06 वेस्टन डिस्टर्वेंस ने भारत के मौसम को प्रभावित किया. वहीं इस वर्ष अप्रैल और मई माह में बारिश, तेज अंधड़, आकाशीय बिजली गिरी साथ ही जमकर ओले भी गिरे.

इन तूफानों ने मचाई तबाही
एक वर्ष में अमूमन 3 से 4 तुफान आते थे, मगर इस बार यह संख्या दो गुनी होकर 7 हो गई. वर्ष 2019 में सात तूफान आए. इसमें फानी, वायू, हिका, कपार्ब, महा, बुलबूल, पवन शामिल हैं. चार तूफानों का सीधा असर भारत और छत्तीसगढ़ पर हुआ. छत्तीसगढ़ के मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि प्रशांत महासागर के पानी का तापमान बढ़ जाना अलनिनों कहलाता है. इसी क्षेत्र का तापमान सामान्य से घट जाना लानिनो कहलाता है. मगर न्यूट्रल कंडिशन के बाद वेस्टन डिस्टर्वेंस आना चिंता का विषय है. तूफान पश्चिम बंगाल की खाड़ी में अधिक बनता है, पर अरब सागर की खाड़ी में बनना चिंता का विषय है. एफमान तूफान का आशिंक असर छत्तीसगढ़ में भी रह सकता है. इसको लेकर अलर्ट जारी किया गया है.