नई दिल्ली । भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके अमेरिकी समकक्ष माइक पोम्पिओ ने  फोन पर ज्वंलंत अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वार्ता की और आपसी सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के बीच द्विरपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा की। वार्ता के दौरान कोरोना महामारी और भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व पर भी चिंता व्याक्तक की गई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट करके बताया कि उनकी अमेरिकी समकक्ष से विभिन्न छेत्रीय मुद्दों पर एक व्यापक बातचीत हुई। इसमें द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की गई। दक्षिण एशिया, अफगानिस्तान, भारत-प्रशांत छेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर स्थिति का मूल्यांकन साझा किया गया। दोनों नेता भारत-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और शांति पर एक मत थे। दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र में स्थिरता का समर्थन किया। इसके अतिरिक्त कोरोना महामारी का मुकाबला करने एवं अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया का समर्थन करने को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच वार्ता हुई। अमेरिका ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाने पर जोर दिया। इसके साथ दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र में आपसी सहयोग के तौर तरीकों पर व्यापक चर्चा की। दोनों नेताओं ने कहा कि जिस तरह से इस पूरे क्षेत्र में चीनी दखल बढ़ रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। इससे इस क्षेत्र की स्थिरता को संकट उत्परन्न हो गया है। इस क्षेत्र में चीनी दिलचस्पी से यहां का सामरिक संतुलन पूरी तरह से बिगड़ चुका है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि चीन की नजर यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर है। इसके साथ वह इस क्षेत्र का सामरिक रूप से भी उपयोग करना चाहता है। इसलिए चीन निरंतर इस क्षेत्र में अपने प्रभुत्वक को बढ़ाने में जुटा है। जयशंकर एवं पोम्पिओ ने क्षेत्रीय और अंतररार्ष्ट्रीय मुद्दों पर पूर्ण सहयोग जारी रखने पर अपनी सहमति जताई। दोनों नेताओं ने इस वर्ष के अंत मेंअमेरिका-भारत 2 + 2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के लिए सहयोग करने पर भी अपनी सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तंत्र को मंजूरी दिए जाने के बाद सितंबर 2018 में पहली 2 + 2 वार्ता नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।