आज विश्व एनेस्थीसिया दिवस है। यह हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। शल्य चिकित्सा में एनेस्थीसिया का विशेष महत्व है। विशेषज्ञों की मानें तो सर्जरी में सर्जन और एनेस्थीसिया दोनों का महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इससे पहले सर्जरी करना आसान नहीं होता था। मरीज को एक दिन के बाद होश आता था। हालांकि, एनेस्थीसिया से सर्जरी करना आसान हो गया है। साथ ही मरीज को सर्जरी के कुछ देर बाद होश जाता है। अक्सर मरीज को सर्जरी के बाद ऑपरेशन थियेटर से बात करते बाहर निकलते देखा जाता है। एनेस्थीसिया से चिकित्सा क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुआ है। इस उपलक्ष्य पर विश्व एनेस्थीसिया दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को सर्जरी में एनेस्थीसिया के महत्पूर्ण योगदान, उपलब्धि और एनेस्थीसिया की जरूरतों के प्रति जागरुक करना है।

एनेस्थीसिया क्या है

एनेस्थीसिया एक द्रव्य है। इसका इस्तेमाल सर्जरी से पहले मरीज को बेहोश करने के लिए किया जाता है। इससे मरीज को सर्जरी के दौरान दर्द महसूस नहीं होता है। इस स्थिति में मरीज कोमा में रहता है। मरीज को एनेस्थीसिया निश्चित समय यानी (सर्जरी होने तक) के लिए दिया जाता है। इसके बाद मरीज को होश जाता है। लकवा जैसे रोग में भी दर्द कम करने के लिए एनेस्थीसिया का इस्तेमाल किया जाता है।

विश्व एनेस्थीसिया दिवस का इतिहास

इतिहासकारों की मानें तो 16 अक्टूबर, सन 1846 को अमेरिका के डेंटिस्ट विलियम टीजी मोर्टन ने एनेस्थीसिया का सबसे पहले प्रयोग किया था। यह प्रयोग और प्रयास सफल रहा था। वर्ल्ड फेडरेशन सोसाइटी ऑफ एनेस्थिसियोलॉजिस्ट (डब्ल्यूएफएसए) की तरफ से हर साल दुनियाभर के देशों में विश्व एनेस्थीसिया दिवस के मौके पर लोगों को जागरुक करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में लोगों को एनेस्थीसिया के बारे में विस्तार से बताया जाता है। साथ ही मॉक टेस्ट के जरिए भी एनेस्थीसिया के महत्व को समझाया जाता है।