पिछले कुछ वक्त से ऐसा देखा जा रहा है कि, लोगों में Mutual Fund SIP में निवेश का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। खास तौर पर अपने करियर के शुरुआती दौर में युवा पीढ़ी काफी अच्छी तादाद में Mutual Fund SIP में इनवेस्ट कर रही है। Mutual Fund SIP की इस लोकप्रियता की वजह है, लंबी अवधि में छोटे मासिक निवेश के साथ बड़ी परिपक्वता रकम विकसित करना।

हालांकि, Mutual Fund SIP में इनवेस्ट करते वक्त हमें कुछ बेसिक बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। अक्सर ही ऐसा देखने को मिलता है कि, Mutual Fund SIP में निवेश करने वाले लोग जानकारी के आभाव के चलते कुछ गलतियां भी कर बैठते हैं। हम आपको इसमें निवेश करते वक्त बरतने वाली सावधानियों से अवगत कराने जा रहे हैं।

ऑप्टिमा मनी मैनेजर के फाउंडर और CEO पंकज मठपाल के अनुसार, "Mutual Fund SIP में निवेश करते वक्त हमें अपने लक्ष्य के हिसाब से फंड का चुनाव करना चाहिए। अगर आप बड़ी रकम लगाना चाह रहे हैं तो, एक ही स्कीम में निवेश करने के बजाय अलग अलग स्कीम में निवेश करना सही होता है। साथ ही अगल अलग स्कीम मे निवेश करते वक्त भी, आपको अलग अलग तारीख के हिसाब से निवेश करना चाहिए।"

डिविडेंड बनाम ग्रोथ प्लान:

विशेषज्ञों मानना ​​है कि बोनिफिट का भुगतान निवेशक के नेट AUM से किया जाता है। जिस वजह से, ग्रोथ प्लान पर डिविडेंड प्लान का चुनाव करने से निवेशक की आय लंबे समय में कम हो जाती है क्योंकि निवेशक कंपाउंडिंग बेनिफिट या टैक्स पर टैक्स का अवसर चूक जाता है। अगर हम टैक्स और निवेश विशेषज्ञों की मानें तो, डिविडेंड प्लान के मुकाबले ग्रोथ प्लान ज्यादा बेहतर होते हैं।

फंड का चुनाव

Mutual Fund SIP के लिए एक योजना को चुनते वक्त, निवेशक को यह सलाह दी जाती है कि, म्यूचुअल फंड के एक से दो साल के प्रदर्शन को देखने की बजाय उसके पिछले 5 से 10 वर्षों के के प्रदर्शन का आकलन करे। इसके अलावा इस अवधि में बेंचमार्क इक्विटी रिटर्न को भी देख लेना सही रहता है। योजना का चुनाव करते वक्त, म्यूचुअल फंड ने लंबे समय में कैसा प्रदर्शन किया है, यह देखने की सलाह दी जाती है।

NAV और पिछला प्रदर्शन

कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि, म्यूचुअल फंड में इनवेस्ट करने वाले यह मानते हैं कि कम NAV (Net Asset Value) वाले Mutual Fund SIP अधिक रिटर्न देते हैं। लेकिन, असलियत में निवेशक को NAV के बजाय म्यूचुअल फंड के पिछले प्रदर्शन पर गौर करना चाहिए। निवेशक को यह ध्यान रखना चाहिए कि उसका असेट मैनेजर म्यूचुअल फंड के NAV से ज्यादा मायने रखता है।