धनबाद। अभी ज्यादा दिनों की बात नहीं है। एक सप्ताह पहले की ही तो बात है। पूरे देश में कोयला संकट का शोर था। पावर प्लांटों में बिजली उत्पादन के लिए कोयले की कमी का सब रोना रो रहे थे। कहा जा रहा था-देश अंधेरे में डूब जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार संकट को खत्म करने के लिए सामने आई। केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्नाल जोशी ने मोर्चा संभाला। वे खुद कोयले के उत्पादन और डिस्पैच को स्पीडअप करने के लिए झारखंड और छत्तीसगढ़ की कई कोयला खदानों में उतरे। उत्पादन और डिस्पैच में वृद्धि हुई। रेलवे ने भी कोयले से लदी मालगाड़ियों के लिए ग्रीन कोरिडोर बनाया। इसके बाद स्थिति सामान्य होने लगी। लेकिन एक बार फिर से चिंता बढ़ गई। कारण बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर के कारण झारखंड और पश्चिम बंगाल में लगातार बारिश। ढेर सारे खदान जलमग्न हो गए हैं। इससे 30 से 35 प्रतिशत तक कोयले का उत्पादन प्रभावित हुआ है। डिस्पैच भी प्रभावित हुआ है।

बीसीसीएल, ईसीएल और सीसीएल के उत्पादन पर बारिश की मार

झारखंड में कोल इंडिया की तीन कंपनियां हैं। बीसीसीएल, ईसीएल और सीसीएल। रांची से लेकर बोकारो और गिरिडीह तक सीसीएल का फैलाव है। बीसीसीएल मुख्यरूप से धनबाद में खनन करती है। हालांकि इसका कुछ इलाका पश्चिम बंगाल और झारखंड के बोकारो में है। ईसीएल की कुछ खदानें धनबाद और झारखंड के संताल परगना में हैं। इसका मुख्यालय पश्चिम बंगाल के साक्तोड़िया में है। ईसीएल की ज्यादातर खदानें पश्चिम बंगाल में हैं। इन इलाकों में रविवार और सोमवार को लगातार झमाझम बारिश हुई। बारिश के कारण पोखरिया खदानों  में पानी भर गया। इससे उत्पादन प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश से कोयले का रेल और रोड डिस्चैप पर भी बुरा असर पड़ा है।

18 के मुकाबले 14 रैक कोयले की हुई सप्लाई 

बीसीसीएल ने प्रत्येक दिन 18 रैक कोयला सप्लाई करना का लक्ष्य रखा है। सोमवार को 14 रैक से ही कोयले की सप्लाई हुई। रैक से ज्यादातर कोयला देश के पश्चिमी राज्यों में जाता है।

मानसून को लेकर अलर्ट जारी

रविवार रात से हो रही बारिश के कारण फिर से एक बार कोल इंडिया प्रबंधन ने कोयला कंपनियों को अलर्ट जारी करते हुए कहा कि कोयला उत्पादन डिस्पैच पर ध्यान देते हुए सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें। सेफ्टी विभाग को इसके लिए खासतौर पर ध्यान देने के लिए कहा गया है।

लगातार बारिश के कारण बीसीसीएल के कोयला उत्पादन डिस्पैच पर काफी प्रभाव डाला। सोमवार को बारिश ने 68 से 70 फीसद उत्पादन डिस्पैच को प्रभावित हुआ। वहीं 14 से 16 रैक ही कोयला सप्लाई हो पाया है। हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। ज्यादा चिंता की बात नहीं है।