रीवा 8 जनवरी/ 

 पिछले दो दिवस में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के द्वारा मशाल जुलूस निकाला एवं कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर भाजपा का झंडा लहराते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। जबकि विपक्षी दल व आमजनता को कलेक्ट्रेट के मुख्यगेट में रोंक कर भारी पुलिस की छाबनी के बीच एसडीएम, तहसीलदार या नायब तहसीलदार या फिर स्वय ज्ञापन लेते हैं यह दोहरा नियम व कानून कब तक । उक्त बिचार भाजपा नेताओं द्वारा कलेक्ट्रेट में 7 जनवरी को दिए गए ज्ञापन पर जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष गुरुमीत सिंह मंगू ने ब्यक्त  करते कहा कि जिला प्रशासन का नियम कठोर यानी कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार में पुलिस का बड़ा पहरा तथा गेट बंद कर दिया जाता है। एवं मुख्य द्वार पर ही एसडीएम, तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार को भेज कर ज्ञापन विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों से स्वीकार किया जाता है।

परंतु जब भारतीय जनता पार्टी के नेता व उनसे जुड़े हुए जनप्रतिनिधि ज्ञापन देने पहुचते हैं तो उनके लिए नियम दूसरा क्यों?  रीवा जिले के मुखिया से यही उम्मीद रीवा जिले की जानता व विपक्षी दल के लोग करते है कि कानून का नियम सभी के साथ एक ही लागू हो। उन्होंने आगे कहा कि जिले के मुखिया से यह उम्मीद है कि कोविड के नियमों को ध्यान में रखते हुए मशाल जुलूस जो निकला है उसे भी संज्ञान में लेंगे और साथ ही जिन लोगों के द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर ज्ञापन सौंपा गया है अथवा साफ तौर से  भाजपा झंडे भी परिसर प्रतिबंधित क्षेत्र  में दिखाई दे रहे हैं, उन दोनों विषयों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्षता पूर्ण उचित कार्रवाई करेंगे । यदि कार्यवाही नहीं होती है  तो जिले का जनमानस व विपक्षी दल यह समझेगा की एक दल विशेष के व्यक्तियों के लिए ही प्रशासन का कानून भाजपा राज्य में है।