रीवा 12 जनवरी 2022. रीवा जिले के आशीष मिश्रा ने निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में काम करने के बाद स्वरोजगार तथा जैविक खेती को अपनाया। उन्होंने सेमरिया में गो फार्म नाम से किसान संगठन बनाया। इससे 500 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। यह संगठन जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जागरूक कर रहा है। साथ ही बसामन मामा गो अभ्यारण्य से प्राप्त गोबर से गोकाष्ट, गोनाइल एवं गोबर की खाद बनाकर स्थानीय बाजार में बेचकर लाभ कमा रहे हैं। आशीष मिश्रा ने इन 500 किसानों को राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना से जोड़ा है। आशीष कड़कनाथ मुर्गे की हैचरी की यूनिट स्थापित कर रहे हैं। इससे तैयार चूजे इन किसानों को दिए जाएंगे।

 

                अपने व्यवसाय के संबंध में आशीष ने बताया कि मेरा किसानों का संगठन नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित है। खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आय के लिए मैंने राष्ट्रीय पशुधन विकास योजना के तहत सेमरिया में कड़कनाथ मुर्गे की हैचरी की यूनिट के लिए आवेदन किया था। मुझे उप संचालक पशुपालन डॉ. राजेश मिश्रा ने कड़कनाथ मुर्गे पालन के संबंध में तकनीकी जानकारी दी। स्टेट बैंक सेमरिया से मुझे 39 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत हो गया है तथा राशि मुझे प्राप्त हो गई है। हैचरी की यूनिट कुल 56 लाख रुपए की है जिसमें पशुपालन विभाग द्वारा 17 लाख रुपए का अनुदान शामिल है। कड़कनाथ मुर्गे को मध्यप्रदेश का जीआई टैग प्राप्त है। इसका मांस बहुत पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है। सामान्य मुर्गे की तुलना में लगभग डेढ़ से दोगुने दाम पर इसकी बिक्री होती है। हैचरी विकसित होते ही मेरे संगठन से जुड़े किसानों को कड़कनाथ मुर्गे पालन की इकाईयां दी जाएंगी। लगभग एक वर्ष में किसानों को अच्छा लाभ मिलने लगेगा। इससे 500 से अधिक किसानों का भाग्य बदल जाएगा। कड़कनाथ मुर्गे पालन तथा जैविक खेती से अन्य किसानों को भी जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।