मुंबई  करीब 12 साल पहले मुंबई से 160 किलोमीटर दूर समुद्र में एक भीषण आग हादसा हुआ था, जब एक जहाज आयल फील्ड प्लेटफॉर्म से टकरा गया था। उस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोगों ने किसी तरह से जान बचाई थी। उनमें से एक थे ओएनजीसी के डेप्युटी जनरल मैनेजर वी के बिंदू लाल बाबू, जो बचाए जाने से पहले साढ़े पांच घंटे तक समुद्र में तैरते रहे थे। लेकिन शनिवार को किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और हेलिकॉप्टर क्रैश  में उनकी जान चली गई।

गौरतलब है कि शनिवार को मुंबई तट से करीब 30 नॉटिकल मील की दूरी पर अरब सागर में ओएनजीसी कर्मचारियों को ले जा रहा एक हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। इस हेलिकॉप्टर पर 7 लोग सवार थे और वह कंपनी के नॉर्थ फील्ड की ओर जा रहा था। शनिवार को वी के बिंदू लाल बाबू को हेलिकॉप्टर में नहीं जाना था, लेकिन उनके 2 सहयोगियों के अनुपस्थित रहने की वजह से उनका नाम अंतिम समय में रोटा में जोड़ दिया गया। 


बाबू के साथ काम करने वाले थॉमस चाको ने बताया, '27 जुलाई 2005 को हुए बॉम्बे हाई फायर हादसे में करीब 100 लोग बचाए गए थे। बाबू ने करीब साढ़े पांच घंटे तक समुद्र में तैर कर जान बचाई थी। बाबू बहुत मिलनसार इंसान थे।' बाबू की फैमिली में पत्नी, बेटी और बेटा हैं। 


बताया जा रहा है कि दाऊफिन एन3 हेलिकॉप्टर ने जुहू से सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर उड़ान भरी थी। हेलिकॉप्टर को 10 बजकर 58 मिनट पर लैंड करना था। सूत्रों के मुताबिक सुबह 10 बजकर 30 पर एटीसी और हेलिकॉप्टर के बीच संपर्क टूट गया। इस हेलिकॉप्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर वीटी-पीडब्ल्यूए है। हेलिकॉप्टर पर सवार 7 में से 5 लोग ओएनजीसी के कर्मचारी और दो पायलट थे। ये कर्मचारी काम पर जा रहे थे।