मुंबई। पिछले कुछ महीनों में देशभर में तमाम व्यवसायियों को सरकार से जीएसटी नोटिस मिली हैं। रिटर्न में गड़बड़ी या कम भुगतान के कारण ये स्थिति आई है। अगर कारोबारी या आपूर्तिकर्ता जीएसटी रिटर्न के दौरान कुछ सावधानियां बरतें तो काफी हद तक समस्याओं से बचा जा सकता है। करदाता कारोबारियों और कंपनियों को जुलाई से दिसंबर 2017 के बीच दाखिल जीएसटी रिटर्न के निरीक्षण के बाद ये नोटिस दी गई हैं। इन नोटिसों के सामने आने के बाद यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कर विभाग का गैर-अनुपालन को लेकर पहले दिखाया गया नरम दृष्टिकोण जीएसटी युग में समाप्त होने जा रहा है। सरकार वाकई में अपना काम सख्ती से करने जा रही है, इसके द्वारा उन सभी व्यावसायों को 3० दिन का समय दिया गया है, जिन्हें नोटिस मिला था। न्यूज एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी में गड़बड़ी से बचने के लिए इन बातों का ख्याल रखें।

1. आपूर्तिकर्ता और खरीदार के रिटर्न में कोई असमानता न हो 

कारोबारियों को सुनिश्चित करना होगा कि अपलोड की गई खरीदारी की जानकारी और आपूर्तिकर्ता द्वारा अपलोड डाटा के बीच कोई गड़बड़ी नहीं होगी। इस तरह इनपुट टैक्स क्रेडिट में गड़बड़ी नहीं होगी। 

2. खातों और लेनदेन कि रिकॉर्ड में कोई विसंगति न हो

जीएसटीआर-3बी के फॉर्म में भरे जाने वाले समरी रिटर्न्स और जीएसटीआर-1 के फॉर्म में फाइनल रिटर्न भरने के दौरान भरे गए डाटा में भी सावधानी बरतें। अकाउंट्स बुक एवं ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड रखने के व्यवस्थित तरीके को अपनाकर ही संभव हो सकता है। 

3. जीएसटी रिटर्न समय पर भरें

टैली शॉल्यूशंस के कार्यकारी निदेशक तेजस गोयनका के मुताबिक, जीएसटी रिटर्न भरने में देरी भी परेशानी का सबब बन सकती है। ऐन वक्त पर भरे रिटर्न में गड़बड़ी की संभावना सबसे ज्यादा रहती है। जल्द ही सरलीकृत रिटर्न फाइलिंग से कारोबारियों को आसानी होगी। 

गड़बड़ी की दो अहम वजहें 

1. जीएसटी रिटर्न में विसंगति की अहम वजह है कि जीएसटीआर-3बी फॉर्म में रिटर्न का सारांश भरने और जीएसटीआर-1 में सभी बाहरी आपूर्तियों की इनवॉइस में अंतर था। इनवॉइस के अनुसार विस्तृत विवरण भरने के दौरान, स्वघोषित जीएसटी और उपलब्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट वैल्यू के बीच अंतर देखा गया। 

2. जीएसटीआर 3-बी और जीएसटीआर-2ए  यानी किसी की आपूर्तिकर्ता से की गई खरीदारी के विवरण में भरे आंकड़ों में अंतर देखा गया। यह इसलिए अहम है, क्योंकि टैक्स के खिलाफ कोई भी गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट आवंटन वास्तव में सप्लायर द्वारा चुकाया जाता है, जिससे राजस्व का नुकसान होता है।

कर के साथ 18 प्रतिशत ब्याज देना होगा

कर के साथ 18 प्रतिशत जुर्माना देना होगा नोटिस जारी होने के एक माह में स्पष्टीकरण न देने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होती है। इसमें गलत ढंग से लिया गया टैक्स रिफंड 18 प्रतिशत ब्याज के साथ वसूला जाता है। इसका उद्देश्य कर चोरी रोकना है।