आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद के बड़े बेटे और विधायक तेज प्रताप यादव ने शुक्रवार को कहा कि वह अभी हरिद्वार में रह रहे हैं और जब तक पत्नी से तलाक के उनके फैसले का परिवार समर्थन नहीं करता है तब तक वह घर नहीं लौटेंगे.
एक समाचार चैनल के साथ फोन पर बातचीत करते हुए तेज प्रताप ने छोटे भाई तेजस्वी यादव को जन्मदिन की बधाई दी लेकिन कहा कि वह नयी दिल्ली में भाई के जन्मदिवस समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे. तेजस्वी दिल्ली में अपनी बहनों से मिलने गए हैं. 
आरजेडी नेता तेज प्रताप को अंतिम बार बोधगया में शनिवार को देखा गया था. रांची में अपने बीमार पिता लालू प्रसाद से मिलकर लौटने के बाद वह वहां एक होटल में रूके थे. 
लालू चारा घोटाले के विभिन्न मामलों में सजायाफ्ता हैं. इस समय वह चिकित्सकीय आधार पर रांची के एक अस्पताल में भर्ती हैं. 
दरअसल तेज प्रताप हाल ही में पत्नी से तलाक की अर्जी दाखिल करने के बाद से चर्चा में हैं. 6 महीने पहले ही बड़ी धूम धाम से उनकी शादी हुई थी. तलाक लेने के बड़े बेटे के फैसले से माना जा रहा है कि लालू प्रसाद दुखी हैं. 
तेज प्रताप यादव का विवाह राजद विधायक चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय के साथ 12 मई को हुआ था. ऐश्वर्या बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय की पौत्री है. 
तेज प्रताप ने कहा, 'हमारे मतभेद में अब समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है, मैंने अपने माता-पिता को विवाह संपन्न होने से पहले इस बारे में अवगत करवा दिया था. लेकिन उस वक्त मेरी किसी ने नहीं सुनी और अब भी मेरी कोई नहीं सुन रहा है, जब तक वे मुझसे सहमत नहीं होते हैं तब तक मैं घर कैसे वापस आ सकता हूं.'
बिहार सरकार में मंत्री रह चुके तेज प्रताप ने उनके वैवाहिक विवाद में नजदीकी संबंधियों, खास कर ससुराल के लोगों द्वारा अदा की गयी भूमिका पर भी नाराजगी जाहिर की. 
छोटे भाई के साथ बढ़ती नाराजगी संबंधी खबरों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं तेजस्वी को अपना आशीर्वाद देता हूं. मेरी कामना है कि वह बिहार का अगला मुख्यमंत्री बने, मैं उसकी तरफ ही रहूंगा और ठीक उसी तरह से उसकी मदद करूंगा जैसे महाभारत में कृष्ण ने अर्जुन की मदद की थी.' 
इस बीच, पार्टी महासचिव और लालू प्रसाद के विश्वस्त सहयोगी भोला यादव ने पत्रकारों से आग्रह किया है कि परिवार के मतभेदों को खबर नहीं बनाएं. उन्होंने कहा, 'लालूजी ठीक नहीं हैं, जो हो रहा है उससे उनका मन और खराब हो रहा है. मीडिया में जिस तरह से चीजों को प्रमुखता दी जा रही है वह उनके लिए पीड़ादाई है.'