नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने शुक्रवार को फॉक्सवैगन को निर्देश दिया कि वह अपनी डीजल गाड़ियों के उत्सर्जन परीक्षण के लिए कथित तौर पर ‘चीट डिवाइस’ (धोखाधड़ी के लिए उपकरण) का इस्तेमाल करने के मामले में सीपीसीबी के समक्ष 100 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि जमा कराए.

राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए एक समिति भी गठित की है. इस समिति में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सदस्य शामिल होंगे. 

समिति को एक महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
हरित अधिकरण ने समिति को निर्देश दिया कि वह एक महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपे और कंपनी तथा मामले में याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह समिति के समक्ष सात दिन के अंदर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें. 

अधिकरण शिक्षिका सलोनी एलावादी और कुछ अन्य की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कथित तौर पर उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन करने पर फॉक्सवैगन गाड़ियों की बिक्री पर प्रतिबंध की मांग की गई है. 

ऑटोमोबाइल कंपनी ने पूर्व में अधिकरण के सामने एक प्रस्ताव पेश कर देश में ‘चीट डिवाइस’ के साथ बेची गई 3.23 लाख गाड़ियों को वापस लेने की रूपरेखा रखी थी. ‘चीट डिवाइस’ डीजल इंजन में लगाया जाने वाला एक ऐसा सॉफ्टवेयर होता है जिससे उत्सर्जन परीक्षण में हेरफेर किया जाता है.