मुंबई। जिस प्रकार लोकसभा चुनाव में भाजपा ने दर्जनों वर्तमान सांसदों का टिकट काटकर नए चेहरे सामने लाये और पार्टी को कामयाबी मिली कुछ इसी तर्ज पर दो-तीन महीने बाद होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव  में भी पार्टी यही फार्मूला अपना सकती है. शायद यही वजह है कि सत्ताधारी दल बीजेपी के विधायक आलाकमान के पास टिकट न काटने की गुहार लेकर पहुंचने लगे हैं. सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस बार करीब 40 से 50 वर्तमान विधायकों का टिकट काट सकते हैं, जिसमें सहयोगी दलों के कोटे की सीटें भी हो सकती हैं. मुंबई में शिव संग्राम पार्टी के हिस्से में आई वर्सोवा सीट पर सबकी निगाहें हैं, क्‍योंकि पिछले दिनों पंकजा मुंडे के साथ विनायक मेटे के हुए मनमुटाव के बाद मुंबई की इस सीट से बीजेपी अपने ही किसी उम्मीदवार को लड़ा सकती है. वर्तमान समय में इस सीट से शिव संग्राम पार्टी की नेता भारती लवेकर बीजेपी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ी थी और यहां से विधायक बनी थी. इस बार विनायक मेटे और महादेव जानकर जैसे छोटे सहयोगियों ने साफ कर दिया है कि वो अपनी पार्टी के ही चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेंगे. सूत्रों की मानें तो पंकजा मुंडे को लोकसभा चुनाव के दौरान सहयोग न देने के कारण वे इस बार विनायक मेटे का चुनावी गणित खराब कर सकती हैं. चर्चा चल रही है कि इस सीट से बीजेपी प्रदेश सचिव संजय पांडेय को अपना उम्मीदवार बना सकती है. हालांकि, कई और नाम भी इस रेस में हैं, लेकिन संजय के ज्यादा सक्रिय होने से लोग मानने लगे हैं कि आलाकमान ने उन्हें विधानसभा में सक्रिय होने के संकेत दे दिए हैं. ऐसे ही कई और सीट हैं जहां पर विधायकों का परफॉर्मेंस सही न होने के कारण बीजेपी उनका टिकट काट सकती है और उनकी जगह नए चेहरों को मौका दे सकती है. आपको बता दें कि इस बार बीजेपी और शिवसेना 135-135 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है और 18 सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ सकती है. साथ ही करीब 20 सीटें बीजेपी और शिवसेना एक दूसरे से बदल सकती हैं.