वास्तुशास्त्र वास्तुशास्त्र में घर के आसपास पेड़-पौधे होना बहुत शुभ होता है, लेकिन घर की किस दिशा में कौनसा वृक्ष होना चाहिए यह देखना भी जरूरी है। कुछ वृक्ष सकारात्मक ऊर्जा देते हैं और कुछ नाकारात्मक। इनमें से जो पेड़ या वृक्ष सकारात्मक ऊर्जा देते हैं उन्हें घर की किस दिशा में लगाएं यह जानना जरूरी है। हालांकि पेड़ लगाने से बुरा नहीं अच्‍छा ही होता है, यहां पेड़ लगाने का विरोध नहीं है लेकिन कहा यह जा रहा है कि किसी वास्तुशास्त्री से पूछकर ही पेड़-पौधे लगाएं। अच्छे पेड़ पौधे लगाएं।
पीपल, बरगद, नीम, शमी और बांस के पेड़ बहुत अच्छे होते हैं। लेकिन उन्हें घर के द्वार के ठीक सामने नहीं लगाया जा सकता। वास्तुशास्त्र में वृक्षवेध के बारे में भी उल्लेख मिलता है। उक्त पेड़ों को लगाना चाहिए लेकिन किस दिशा में यह जरूर जानें।

1. कदम्ब, केला और नींबू जिसके घर में उत्पन्न होता है, उस घर का मालिक कभी विकास नहीं करता। अत: इसकी दिशा का ज्ञान होना जरूरी है।

2. पाकड़, गूलर, आम, नीम, बहेड़ा तथा कांटेदार वृक्ष, पीपल, अगस्त, इमली ये सभी घर के समीप निंदित कहे गए हैं। घर की छाया से थोड़ी दूर पर पीपल, आम और नीम लगा सकते हैं।
3. कहते हैं कि पूर्व में पीपल, अग्निकोण में दुग्धदार वृक्ष, दक्षिण में पाकड़, निम्ब, नैऋत्य में कदम्ब, पश्‍चिम में कांटेदार वृक्ष, उत्तर में गूलर, केला, छाई और ईशान में कदली वृक्ष नहीं लगाना चाहिए। किसी वास्तुशास्त्री से सलाह लें।

4. पूर्व में लगे फलदार वृक्ष से संतति की हानि, पश्चिम में लगे कांटेदार वृक्ष से शत्रु का भय, दक्षिण में दूधवाले वृक्ष लगे होने से धन नाश होता है। ये वृक्ष पीड़ा, कलह, नेत्ररोग तथा शोक प्रदान करते हैं। हालांकि ये वृक्ष घर की किसी भी दिशा में नहीं हों, तो ही अच्‍छा है।
5. बैर, पाकड़, बबूल, गूलर आदि कांटेदार पेड़ घर में दुश्मनी पैदा करते हैं। इनमें जति और गुलाब अपवाद हैं। घर में कैक्टस के पौधे नहीं लगाएं।

6. जामुन और अमरूद को छोड़कर फलदार वृक्ष भवन की सीमा में नहीं होने चाहिए। इससे बच्चों का स्वास्थ्य खराब होता है।

7. आवासीय परिसर में दूध वाले वृक्ष लगाने से धनहानि होती है।

8. जिन पेड़ों से गोंद निकलता हो अर्थात चीड़ आदि घर के परिसर में नहीं लगाने चाहिए। यह धनहानि की आशंका को बढ़ाता है।
9. घर की दक्षिण दिशा में गुलमोहर, पाकड़, कटहल के वृक्ष लगाने से अकारण शत्रुता, अर्थनाश, असंतोष व कलह होने की आशंका रहती है।

10. दक्षिण पूर्व दिशा अर्थात आग्नेय कोण की ओर पलाश, जवाकुसुम, बरगद, लाल गुलाब अशुभ एवं कष्टदायक होते हैं। इस दिशा में लाल फूलों के वृक्षों व लताएं तथा कांटे वाले वृक्ष अनिष्टकारक एवं मृत्युकारक माने गए हैं।