इन्दौर । भगवान शिव के नाम वाले मंत्रों की शक्ति सर्वाधिक है। शिव ही सत्य है और शिव ही सर्व शक्तिमान है। शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं। शिव ही सृष्टि के पालनहार हैं और वे ही तारणहार हैं। शिव के बिना न तो मुक्ति हो सकती है और न ही गति मिल सकती है। शिव श्रद्धा है और पार्वती विश्वास। जीवन के यही दो आधार हैं, श्रद्धा और विश्वास के बिना कोई भी जीवन सार्थक नहीं हो सकता। श्रद्धा और विश्वास का मिलन ही शिव और पार्वती का विवाह प्रसंग है। यह प्रसंग शुक्रवार को मनाया जाएगा।
ये प्रेरक विचार हैं नमः शिवाय मिशन ट्रस्ट शिवकोठी ओंकारेश्वर के संस्थापक एवं एक रोटी बाबाजी के नाम से प्रख्यात स्वामी शिवोहम भारती महाराज के, जो उन्होंने आज गीता भवन के सत्संग सभागृह में आंखों पर पट्टी बांधकर शिवपुराण की कथा सुनाते हुए व्यक्त किए। शुक्रवार को कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह का जीवंत उत्सव भी धूमधाम से मनाया जाएगा। महाराजश्री के सान्निध्य में 24 सितंबर तक सुबह 10 बजे से दिवंगत पितरों के मोक्ष का अनुष्ठान तथा दोपहर 2 से सांय 6.30 बजे तक शिव पुराण कथा का संगीतमय अनुष्ठान चल रहा है। कथा शुभारंभ के पूर्व वरिष्ठ पत्रकार कृष्णकुमार अष्ठाना, दिनेश गुप्ता, नरेश गुप्ता, मोहन मोदी, राजेंद्र गर्ग, रामविलास राठी आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा समापन की बेला में आरती के पूर्व अतिथियों द्वारा महाराजश्री की आंखों पर बंधी पट्टी खोली गई तो भक्तों ने भावविभोर होकर करतल ध्वनि से स्वागत किया। संचालन त्रिपुरारीलाल शर्मा ने किया और आभार माना महेश गुप्ता ने।
स्वामी शिवोहम भारती ने कहा कि जीवन में श्रद्धा के बिना कोई भी कार्य परिपूर्ण नहीं हो सकता। हमारी प्रवृत्ति संदेह करने की है, विश्वास करने की नहीं। यही कारण है कि हमें अपने लक्ष्य या तो मिलते ही नहीं, या मिलते भी हैं तो आधे अधूरे ही मिलते हैं। हम कलियुग में अनेक बुराईयों में उलझे हुए हैं। समय तेजी से निकल रहा है इसे पकड़ना आसान नहीं है। जन्म भी बार-बार नहीं मिलता। शिव की तरह समाज का कल्याण करने के लिए ही हमारी सारी गतिविधियां होना चाहिए।