दिल्ली,शिवांगी: रुपए पैसे की तंगी में 21 साल बिताने वाले एक शख्स ने तीन लोगों को ऐसी दौलत बांटी कि अच्छे अच्छे दौलतमंद उसके आगे गरीब नजर आएं. दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती हुए युवक की मृत्यु के बाद उसके परिजनों ने उसके अंग दान कर दिए. मृतक की दो किडनी(Kidney) और लिवर ट्रांसप्लांट के लिए निकाल लिए गए जिसमें से एक किडनी(Kidney) और लिवर को एम्स में भेजा गया है जबकि एक किडनी(Kidney) को राम मनोहर लोहिया में ही भर्ती एक मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट कर दिया गया है. 21 वर्षीय जसमान को 17 सितंबर को छत से गिरने के कारण सिर में गहरी चोट आई थी. जिसके बाद उन्हें तुरंत RML अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती कर लिया गया.
मगर चोट गहरी होने के कारण मरीज कोमा में चला गया. जिसके कुछ समय बाद उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया. ब्रेन डेड होने की पुष्टि होते ही अस्पताल के ट्रांसप्लांट काउंसलर ने परिजनों को हिम्मत देने के साथ ही उन्हें अंग दान का महत्व समझाया. जिसके बाद मृतक के बड़े भाई सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाते हुए अपने छोटे भाई के अंगों को दान करने के लिए राजी हो गए.
इसके बाद परिजनों की अनुमति मिलते ही अलग अलग डॉक्टरों की टीमों ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया. 42 वर्षीय मरीज़ जिन्हें मृतक की किडनी(Kidney) लगाई गई है. वो 2017 से किडनी(Kidney) की बीमारी से जूझ रहे थे और तभी से लगातार डायलिसिस पर थे. फिलहाल वो किडनी(Kidney) फेलियर के आखिरी स्टेज से गुज़र रहे थे.
अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ वी के तिवारी ने बताया कि ऑपरेशन कामयाब रहा और मरीज़ की किड्नी एक पूरी तरह से स्वस्थ किड्नी की तरह काम कर रही है. भारत में हर साल क़रीब 1.5 लाख किड्नी और 50,000  लिवर की ज़रूरत पड़ती है जिस में से केवल 5000 किडनी(Kidney) और 2000 लिवर डोनेशन से मुहैया हो पाते है.
डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल के न्यूरोसर्जन एल एन गुप्ता का कहना है कि भारत में जागरूकता की कमी और सामाजिक अंधविश्वास के कारण अधिकतर लोग ऑर्गन डोनेशन से मुँह फेर लेते हैं. इस विषय में जागरूकता फैलाने की बेहद ज़रूरत है, क्योंकि एक मृत व्यक्ति के organs से कम से कम 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है.