भोपाल,शहर के एक परिवार में बेटी के बाद पिता में कोरोना पोजिटिव पाए जाने के बाद लोगों में डर का माहौल बन रहा है. लेकिन घबराइए नहीं स्वास्थ्य विभाग खतरे को भांपते हुए दस कदम आगे की तयारी में लगा हुआ है. शहर के दो बड़े सरकारी अस्पतालों से मरीजों को जरुरी दवाएं और सलाह देकर छुट्टी कर दी गई है. वहीँ स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में उपलब्ध बिस्तर, वेंटिलेटर सहित स्टाफ की जानकारी मांगी है. ताकि जरुरत पड़ने पर कोरोना के पीड़ित मरीजों का बेहतर इलाज किया जा सके.

स्वास्थ्य विभाग ने अब हमीदिया और भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) को कोरोना का ट्रीटमेंट सेंटर बनाया है. इस वजह से अब इन अस्पतालों से उन मरीजों की छुट्टी कर दी गई है जो घर पर रहकर अपनी दवाई लेकर रह सकते हैं, 800 बिस्तरों के हमीदिया अस्पताल में सिर्फ गंभीर मरीजों को ही रखा गया है 500 से ज्यादा मरीजों को यहाँ से छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है. वहीँ 300 बिस्तरों के बीएमएचआरसी में अब सिर्फ कोरोना के मरीजों का ही उपचार किया जायेगा.

कोरोना से उपचार के लिए विभाग ने हमीदिया अस्पताल और बीएमएचआरसी को ट्रीटमेंट सेंटर के रूप में तैयार किया गया है। यहां भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज कर करीब ग्यारह सौ बिस्तर सिर्फ कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसके साथ ही एडवांस मेडिकल कॉलेज के ३०० बिस्तरों को क्वारेटाइन सेंटर के रूप में रिवर्ज किया गया है। वहीं एम्स अस्पताल में १० बेड और जेपी अस्पताल में भी २० बिस्तरों का आइसालेशन वार्ड तैयार है। इसके अलावा शहर के 129 अस्पतालों को पत्र लिखा गया है कि वह आगामी समय के लिए तैयार रहें। वहीं शहर में पांच निजी मेडिकल कॉलेजों को भी तैयार रहने को बोला गया है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि यहां सबकी जांच की जरूरत नहीं है। वायरस का असर दो से 14 दिनों के भीतर होता है, इस दौरान कभी भी इसका प्रभाव हो सकता है। 80 फीसदी लोगों को हल्का बुखार होता है, जो स्वत: ठीक हो जाता है। 20 फीसद में कुछ खांसी, जुकाम व बुखार होता है। मात्र पांच फीसदी मरीजों को ही अस्पताल जाने की जरूरत पड़ती है। इलाज में कुछ नई दवाइयां आई है, जिनका उपयोग किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक हमीदिया अस्पताल में १०० से ज्यादा वेंटीलेटर हैं। इसके साथ ही बीएमएचआरसी में ५०, जेपी अस्पताल में १२ के साथ शहर के अन्य प्रायवेट मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पतालों में करीब १००० वेंटीलेटर है। इनमें से सरकारी अस्पतालों में मौजूद ५०० वेंटीलेटर को रिवर्ज किया गया है, जरूरत पडऩे पर विभाग बाकी का उपयोग भी कर सकता है।