नई दिल्ली.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) रेडियो कार्यक्रम मन की बात (Mann Ki Baat) 2.0 के जरिए बातचीत कर रहे हैं. बता दें प्रधानमंत्री हर महीने के आखिरी रविवार को मन की बात के माध्यम से देश को संबोधित करते हैं. बीते साल मई में दोबारा सरकार बनने के बाद से प्रधानमंत्री का मन के बात का 12वां संस्करण है. इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नमो एप और माइ जीओवी पर सुझाव मांगे थे. बता दें कि इसी दिन लॉकडाउन का चौथा चरण खत्म हो रहा है.

इससे पहले हुए मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को दो गज की दूरी बनाए रखने का संदेश दिया था. इसके साथ ही उन्होंने लोगों से घर पर ही रहने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि मैं आपसे आग्रह करूंगा कि हम कतई अति-आत्मविश्वास में न फंस जाएं, हमें कभी भी ऐसे विचार नहीं पालने चाहिए कि हमारे शहर में, गांव में या फिर हमारी गली में कोरोना आ ही नहीं सकता. उन्होंने कहा कि दुनिया का अनुभव हमें बहुत कुछ बता रहा है और हमारे यहां तो बारबार कहा जाता रहा है. सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी.
हमारे रेलवे के साथी दिन-रात लगे हुए हैं. केंद्र हो, राज्य हो, - स्थानीय स्वराज की संस्थाएं हो - हर कोई, दिन-रात मेहनत कर रहें हैं. जिस प्रकार रेलवे के कर्मचारी आज जुटे हुए हैं, थे भी एक प्रकार से अग्रिम पंक्ति में खड़े कोरोना वॉरियर्स ही हैं. लाखों श्रमिकों को, ट्रेनों से, और बसों से, सुरक्षित ले जाना, उनके खाने-पाने की चिंता करना, हर जिले में Quarantine केन्द्रों की व्यवस्था करना, सभी की Testing, Check-up, उपचार की व्यवस्था करना, ये सब काम लगातार चल रहे हैं, 3 और, बहुत बड़ी मात्रा में चल रहे हैं.
हमारे देश में भी कोई वर्ग ऐसा नहीं है जो कठिनाई में न हो, परेशानी में न हो, और इस संकट की सबसे बड़ी चोट, अगर किसी पर पड़ी है, तो, हमारे गरीब, मजदूर, श्रमिक वर्ग पर पड़ी है. उनकी तकलीफ, उनका दर्द, उनकी पीड़ा, शब्दों में नहीं कही जा सकती. हम में से कौन ऐसा होगा जो उनकी और उनके परिवार की तकलीफों को अनुभव न कर रहा हो. हम सब मिलकर इस तकलीफ को, इस पीड़ा को, बांटने का प्रयास कर रहे हैं, पूरा देश प्रयास कर रहा है.
कोरोना के खिलाफ लड़ाई का यह रास्ता लंबा है. एक ऐसी आपदा जिसका पूरी दुनिया के पास कोई इलाज ही नहीं है, जिसका, कोई पहले का अनुभव ही नहीं है, तो ऐसे में, नयी-नयी चुनौतियाँ और उसके कारण परेशानियाँ हम अनुभव भी कर रहें हैं. ये दुनिया के हर कोरोना प्रभावित देश में हो रहा है और इसलिए भारत भी इससे अछूता नहीं है.
मैं social media में कई तस्वीरें देख रहा था. कई दुकानदारों ने, दो गज की दूरी के लिए, दुकान में, बड़े pipeline लगा लिए हैं, जिसमें, एक छोर से वो ऊपर से सामान डालते हैं, और दूसरी छोर से, ग्राहक, अपना सामान ले लेते हैं. इस दौरान पढ़ाई के क्षेत्र में भी कई अलग-अलग innovation शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर किए हैं. online classes, video classes, उसको भी, अलग-अलग तरीकों से innovate किया जा रहा है.
एक और बात, जो, मेरे मन को छू गई है, वो है, संकट की इस घड़ी में innovation. तमाम देशवासी गाँवों से लेकर शहरों तक, हमारे छोटे व्यापारियों से लेकर startup तक, हमारी labs कोरोना के खिलाफ लड़ाई में, नए-नए तरीके इजाद कर रहे हैं, नए-नए innovation कर रहे हैं.
देश के सभी इलाकों से women self help group के परिश्रम की भी अनगिनत कहानियाँ इन दिनों हमारे सामने आ रही हैं. गांवों में, छोटे कस्बों में, हमारी बहनें-बेटियाँ, हर दिन हजारों की संख्या में mask बना रही हैं. तमाम सामाजिक संस्थाएं भी इस काम में इनका सहयोग कर रही हैं.
हमारे डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, सफाईकर्मी, पुलिसकर्मी, मीडिया के साथी, ये सब, जो सेवा कर रहे हैं, उसकी चर्चा मैंने कई बार की है. मन की बात में भी मैंने उसका जिक्र किया है. सेवा में अपना सब कुछ समर्पित कर देने वाले लोगों की संख्या अनगिनत है.
देशवासियों की संकल्प शक्ति के साथ, एक और शक्ति इस लड़ाई में हमारी सबसे बड़ी ताकत है - वो है - देशवासियों की सेवा शक्ति . वास्तव में, इस महामारी के समय, हम भारतवासियों ने दिखा है कि  सेवा और त्याग का हमारा विचार, केवल हमारा आदर्श नहीं है, बल्कि, भारत की जीवनपद्धति है, और, हमारे यहाँ तो कहा गया है सेवा परमो धर्मः सेवा स्वयं में सुख है, सेवा में ही संतोष है.
कोरोना से होने वाली मृत्यु दर भी हमारे देश में काफी कम है. जो नुकसान हुआ है, उसका दुःख हम सबको है. लेकिन जो कुछ भी हम बचा पाएं हैं, वो निश्चित तौर पर, देश की सामूहिक संकल्प शक्ति का ही परिणाम है. इतने बड़े देश में, हर-एक देशवासी ने, खुद, इस लड़ाई को लड़ने की ठानी है, ये पूरी मुहिम people driven है.