मुम्बई । अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की क्रिकेट समिति ने गेंद को चमकाने के लिए किसी कृत्रिम पदार्थ के उपयोग की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। आईसीसी समिति ने इससे पहले कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए गेंद चमकाने के लिए लार के इस्तेमाल पर प्रतिबंध का सुझाव दिया था। वहीं इसके बाद कई दिग्गज गेंदबाजों ने कहा था कि ऐसे में गेंद चमकाने के लिए किसी कृत्रिम पदार्थ के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए नहीं तो खेल बल्लेबाजों के पक्ष में चला जाएगा। इसपर आईसीसी पैनल के प्रमुख और दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले ने कहा कि गेंद को चमकाने की जरुरत केवल टेस्ट में पड़ी है और ऐसे में यह कमी दो स्पिनरों को शामिल कर पूरी की जा सकती है। कुंबले ने कहा कि पिच की स्थिति के अनुरूप टीम संयोजन तैयार करके भी बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बनाया जा सकता है। कुंबले ने एक कार्यक्रम में कहा, 'क्रिकेट में आपके पास पिच होती है, जिसके हिसाब से आप खेल सकते हैं तथा बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बना सकते हैं।'
वहीं गेंदबाजों के अनुसार टेस्ट क्रिकेट में लार के उपयोग की कमी महसूस होगी क्योंकि इससे उन्हें परंपरागत और रिवर्स स्विंग हासिल करने में मदद मिलती है। इसपर कुंबले ने कहा, 'आप पिच पर घास छोड़ सकते हो या दो स्पिनरों के साथ खेल सकते हो। साथ ही कहा कि टेस्ट मैचों में स्पिनरों को जगह दें क्योंकि एकदिवसीय मैच या टी20 में आप गेंद को चमकाने को लेकर परेशान नहीं रहते हैं। केवल टेस्ट में ही इसकी जरुरत पड़ती है।' इस पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा, 'टेस्ट मैचों में हम ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में दो-दो स्पिनरों के साथ खेल सकते हैं पर खेलते नहीं हैं तब गेंद चमकाने की परेशानी नहीं आयेगी।' कुंबले ने पहले भी कहा था कि लार पर प्रतिबंध अंतरिम उपाय है और उन्होंने कहा कि कृत्रिम पदार्थ के उपयोग की अनुमति से खेल में रचनात्मकता समाप्त हो जाएगी। 
उन्होंने कहा, 'हम गेंद पर कुछ अन्य पदार्थ का उपयोग कर सकते हैं। गेंद पर क्या उपयोग करना है और क्या नहीं, इसको लेकर इतने वर्षों तक हमारा रवैया विरोध में रहा है और इसके खिलाफ सख्त कदम उठाये गये हैं।' कुंबले ने हालांकि स्वीकार किया कि खिलाड़ियों के लिए लार का उपयोग नहीं करने से तालमेल बिठाना मुश्किल होगा। साथ ही कहा कि यह अभ्यास की बात है, जिसे उन्हें धीरे-धीरे शुरू करना होगा।'