अक्सर कहा जाता है कि अगर शादीशुदा महिला पैरों में पायल पहनती हैं तो यह शुभ होता है इसलिए परंपराओं के अनुसार सुहागिन को आजीवन पायल पहननी चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं पायल पहनने के पीछे पारंपरिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक कारण भी हैं। महिलाएं हमेशा चांदी की पायल पहनती हैं तो चांदी उनके अंगों से चिपकी रहती हैं जो महिलाओं को शीतलता प्रदान करता है जिससे वो कई बीमारियों से दूर रहती है।

पायल पहनने के फायदे:
शादी के बाद पहने जाने वाली पायल बेहद महत्‍वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इसे पहनने से महिलाओं को पॉजीटिव एनर्जी मिलती है। पायल पहनने से न सिर्फ नेगेटिव एनर्जी दूर रहती हैं बल्कि यह महिलाओं के लिए एक रक्षा कवच भी होती हैं जो सुहागिनों को बुरी नजर से बचाती हैं। इसलिए भी पैरों में पायल पहनने की पंरपरा बनी हुई हैं।

पायल को पहनने के पीछे एक वैज्ञानिक तर्क और है कि यह हड्ड‍ियों को मजबूत बनाती है। दरअसल, पायल जब पैरों पर रगड़ती है तो त्‍वचा के माध्‍यम से इसके तत्‍व हड्डियों को लाभ पहुंचाते हैं।

इसके अलावा यह भी माना जाता है कि यदि किसी विवाहिता के पैरों में सूजन आ जाए और वह पायल पहन ले तो यह समस्‍या दूर हो सकती है।

चांदी शरीर को ठंडा रखती है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखती है। मान्‍यता यह है कि यदि किसी महिला का स्‍वास्‍थ्‍य खराब रहता है तो पायल पहनने से उसकी सेहत में सुधार आने लगता है।