अमेरिका । अमेरिका-ब्राजील में रोजाना करीब 50 हजार नए मामले सामने आ रहे हैं लेकिन मौतें पहले के मुकाबले कम हो रही हैं। वैज्ञानिकों ने इसके पीछे की वजह ढूंढ निकाली है। उनका कहना है कि इस बदलाव के पीछे कोरोना वायरस का नया रूप ‘जी 614 जिम्मेदार है। इससे संक्रमण तो काफी तेजी से बढ़ रहा है लेकिन जान जाने का जोखिम कम हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं का यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के मुताबिक कोरोना के नए रूप ने यूरोप से लेकर अमेरिका तक बहुत तेजी से संक्रमण फैलाया। हालांकि, लोगों को पहले से अधिक बीमार नहीं किया। यानी इस नए कोरोना वायरस से दुनिया में कोई नए तरह का खतरा पैदा नहीं होता है।  अमेरिका के लॉस अलामॉस नेशनल लैबोरेटरी के इस अध्ययन के बारे में मुख्य लेखक बेट कोर्बर कहते हैं कि कोविड-19 के वायरस में रूप परिवर्तन म्यूटेशन की क्षमता है। हमने अप्रैल की शुरूआत में वायरस के अनुवांशिक अनुक्रम में म्यूटेशन होते पाया। जिससे पता लगा कि वायरस के पूर्व रूप डी614 में आश्चर्यजनक बदलाव हो रहे हैं। 
इस आधार पर वैज्ञानिकों ने वायरस के कई अनुवांशिक अनुक्रमों को जांचा। साथ ही वायरस के इंसानों, जानवरों और प्रयोगशाला में कोशिकाओं पर रूप परिवर्तन का अध्ययन किया। जिससे पता लगा कि ज्यादातर संक्रमणों में वायरस का नया रूप ‘जी614’ मौजूद था जो कि ज्यादा तेजी से संक्रमण फैलाता है। कैलिफोर्निया के ला जोला इंस्टीट्यूट फॉर इम्यूनोलॉजी की वैज्ञानिक एवं प्रमुख शोधार्थी एरिका ओल्मन सैफायर का कहना है कि अब पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा लोग ‘जी614’ कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। यह रूप  कोरोना के पूर्व रूप ‘डी614’ की तुलना में तीन से नौ गुना ज्यादा तेजी से संक्रमण फैलाता है। मार्च की शुरूआत में इसकी मौजूदगी यूरोप में थी और मार्च के अंत तक यह अमेरिका तक फैल चुका था। रूप परिवर्तन ने कोरोना वायरस के प्रोटीन स्पाइक पर असर किया है। स्पाइक वायरस की वह संरचना होती है, जिसका इस्तेमाल करके वह मानव कोशिका से प्रवेश करता है।