भगवान और भक्तों की वैसे तो कई कथा है जो आपने सुनी होगी लेकिन आज हम आपको एक ऐसी कथा बताने जा रहे हैं जो बहुत अनोखी है. यह कथा है भगवान विष्णु और ध्रुव की. आइए जानते हैं.

कथा -ध्रुव के पिता की दो पत्नियां थी और वो अपनी दूसरी पत्नी से अधिक प्रेम करते थे. क्योंकि वो देखने में ज्यादा सुंदर थी. दूसरी पत्नी से उन्हें एक पुत्र भी हुआ और वो इस पुत्र से सबसे अधिक प्यार करते थे. वहीं एक बार ध्रुव ने अपने पिता की गोद में बैठने की इच्छा जाहिर की. वहीं उसकी सौतेली मां ने उसे रोक दिया. उस समय सौतेली मां ने जब रोका तो ध्रुव रोने लगा. उस समय पिता की गोदी में बैठने से रोकते हुए सौतेली मां ने पांच साल के ध्रवु से कहा, जा जाकर भगवान की गोद में बैठ जा. सौतेली मां की इस बात को सुनने के बाद ध्रुव रोते हुए अपनी मां के पास गया और मां से पूछने लगा कि मां भगवान कैसे मिलेंगे?

उसके बाद ध्रुव की मां ने जवाब दिया कि भगवान को पाने के लिए जंगल में जाकर घोर तपस्या करनी पड़ेगी. तभी तुमको भगवान मिल संकेगे. मां की बात सुनकर ध्रुव ने जंगल जाने की जिद पकड़ ली और भगवान की गोद में बैठने की इच्छा जाहिर की. भगवान की गोद में बैठने के लिए ध्रुव जंगल की ओर निकल पड़ा और एक पेड़ के नीचे बैठकर ध्यान लगना शुरू कर दिया. छोटे से ध्रुव को कोई भी मंत्र नहीं आता था. तब ध्रुव की मदद के लिए नारद जी वहां पहुंचे और उन्होंने ध्रुव को गुरु मंत्र दे दिया. जो कि ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम:. था. ध्रुव ने इस मंत्र का जाप करना शुरू कर दिया. ताकि भगवान उनके पास आए और वो भगवान की गोद में बैठ जाए. ध्रुव ने मन से भगवान को याद किया और भगवान विष्णु जी प्रकट हो गए.

जिसके बाद विष्णु जी ने ध्रुव से वर मांगने को कहा. ध्रुव ने विष्णु जी से कहा कि 'मुझे अपनी गोद में बैठा लीजिए.' ध्रुव की इस इच्छा को विष्णु जी ने पूरा कर दिया और उसे अपनी गोद में बैठा लिया. जब इस बारे में राज्य के लोगों को पता चला तो सभी ने ध्रवु का सम्मान किया और ध्रुव के पिता ने उसे अपना सिंहासन पर बैठा दिया.