नई दिल्ली: आज के समय में इंटरनेट (Internet) लोगों की जिंदगी और जरूरत बन चुका है. इसके बिना ऐसा लगता है कि जिंदगी अधूरी रह गई हो. किसी कारणवश ऑनलाइन न हो पाने से लोग छटपटा जाते हैं. अगर आपको भी ऑनलाइन न हो पाने के कारण उलझन होती है, तो यह परेशानी की बात हो सकती है.

एक अध्ययन के मुताबिक, ऑनलाइन (Online) न होने के कारण स्ट्रेस अनुभव करने वाले लोग डिस्कोमगूगोलेशन की समस्या से पीड़ित हो सकते हैं. वेब उनके सारे सवालों के जवाब और उनके अकेलेपन का साथी बन चुका है. ऐसे में जब वो ऑनलाइन एक्सेस नहीं कर पाते, तो इसी छटपटाहट में वे धीरे-धीरे डिस्कोमगूगोलेशन के शिकार होते जाते हैं. यह शब्द डिस्कोमबोबुलेट और गूगल से मिलकर बनाया गया है. डिस्कोमबोबुलेट का मतलब हताशा या असमंजस होता है.

डिस्कोमगूगोलेशन: मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, डिस्कोमगूगोलेशन एक तरह का अहसास है. जब कोई व्यक्ति सूचनाओं के संसार यानी इंटरनेट को एक्सेस नहीं कर पाता है, तो उसके दिमाग की गतिविधि असाधारण हो जाती है.यह एक नए तरह का सिंड्रोम है, जो कि किसी समस्या का तुरंत उत्तर न ढूंढ पाने और इंटरनेट पास न होने के कारण किसी समस्या का समाधान न हो पाने के कारण होता है. वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया कि यह मीटिंग में देर से पहुंचने, किसी महत्वपूर्ण एग्जाम को देने के समय होने वाले तनाव के बराबर होता है. इस सर्वे को वैज्ञानिकों ने 2000 लोगों के ऊपर किया.

वैज्ञानिकों के दल ने जब लोगों के ह्दय और दिमाग को मॉनिटर के द्वारा नापा तो उन्होंने पाया कि पुरुष की बैचेनी महिलाओं की तुलना में ज्यादा थी. उन्होंने देखा कि नेट एक्सेस न कर पाने के कारण पुरुषों में स्ट्रेस की समस्या ज्यादा होती है. सर्वे में यह भी देखा गया कि इंटरनेट कनेक्शन काट देने के बाद लोगों के दिमाग और ब्लड प्रेशर में एकदम से तेजी आ गई.

 

मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि कुछ लोगों की इंटरनेट पर निर्भरता काफी अधिक हो जाती है. इसके हानिकारक प्रभाव भी होते हैं. आपकी अंगुलियां, गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर प्रभाव पड़ता है. इसका असर नींद और आपके मन पर भी पड़ता है. इसके लिए जरूरी है कि बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें और शारीरिक गतिविधियां बढ़ाएं. इसका प्रभाव आपके स्वभाव पर भी देखने को मिलता है. इसके लिए सबसे आवश्यक यह है कि आप इंटरनेट के आदी न हों.