केरल के कोझिकोड में शुक्रवार को एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान हादसे में दो पायलट सहित 18 लोगों की जान चली गई। एविएशन रेग्युलेटर डीजीसीए ने कोझिकोड एयरपोर्ट पर कई गंभीर सुरक्षा खामियों को देखने के बाद पिछले साल 11 जुलाई को एयरपोर्ट के डायरेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। एक साल बाद आखिर वही हुआ जिसका डीजीसीए को डर था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डीजीसीए की चेतावनियों के बाद ईमानदारी से खामियों को दूर नहीं किया गया था?  

अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि उस दौरान अन्य स्थानों के साथ रनवे और एपरोन में खामियां मिली थीं। डीजीसीए ने रनवे में दरारों, पानी ठहराव और अधिक रबर जमा हो जाने को लेकर चेतावनी दी थी। पिछले साल 2 जुलाई को सऊदी अरब से कोझिकोड आए एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान के टेल स्ट्राइक (पिछले हिस्से का जमीन छू जाना) के बाद डीजीसीए ने निरीक्षण किया था।
एक साल से कुछ ही अधिक समय के बाद शुक्रवार शाम को एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान यहां दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 190 यात्रियों को लेकर दुबई से आया विमान रनवे नंबर 10 को पार कर गया और 30 फीट गहरी खाई में जा गिरा। विमान के दो टुकड़े हो गए, जिससे दो पायलट सहित 18 लोगों की मौत हो गई। 

डीजीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''पिछले साल 2 जुलाई की दुर्घटना के बाद डीजीसीए ने 4 और 5 जुलाई को एयरपोर्ट का निरीक्षण किया था। इस दौरान कई गंभीर खामियां पाई गई थीं। 11 जुलाई को कोझिकोड एयरपोर्ट डायरेक्टर के श्रीनिवास राव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

यह पूछने पर कि क्या नोटिस के बाद राव के खिलाफ कोई एक्शन लिया गया था। उन्होंने कहा, ''हमने कुछ मुद्दे उठाए थे, जिनका पालन किया गया था। राव को फटकार लगाई गई थी।" नोटिस में लिखा गया था, ''रनवे 28 TDZ (डचडाउन जोन) और रनवे 10 TDZ के सेंटर लेफ्ट मार्किंग के पास दरारें हैं। टचडाउन जोन वह हिस्सा होता है जहां एयरक्राफ्ट पहली बार जमीन को छूता है। 

नोटिस में यह भी कहा गया है कि रनवे 28 के टचडाउन जोन के C/L मार्किंग के तीन मीटर तक दोनों तरफ अत्यधिक रबर जमा है। साथ ही रनवे 10 के डचडाउन जोन में C/L मार्किंग के पास भी इसी तरह की दरारें हैं।