लंदन । कोरोना संक्रमण के चलते लोगों की जीवन प्रत्याशा, एक व्यक्ति के जीवित रहने की औसत अवधि में कमी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।अध्ययन के मुताबिक अमेरिकी पुरुषों की जीवन प्रत्याशा में दो साल से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जोकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे ज्यादा है। अध्ययन में विश्लेषित किए गए 29 देशों में से 22 में 2019 की तुलना में जीवन प्रत्याशा में छह महीने से अधिक की गिरावट आई है, इन देशों में यूरोपीय देश, संयुक्त राज्य अमेरिका और चिली भी शामिल हैं।कुल मिलाकर 29 देशों में से 27 में जीवन प्रत्याशा में कमी आई है।
बता दें कि जीवन प्रत्याशा एक व्यक्ति के जीवित रहने की औसत अवधि है, जोकि जन्मतिथि, वर्तमान आयु, लिंग के साथ अन्य भौगोलिक कारकों पर निर्भर करती है।सरल शब्दों में कहें,तब एक व्यक्ति औसत कितने साल जिंदा रहेगा। शोधकर्ताओं ने कहा है कि विभिन्न देशों में जीवन प्रत्याशा में कमी को आधिकारिक कोविंड-19 मौतों से जोड़ा जा सकता है।कोरोना के कारण पूरी दुनिया में लगभग 5 मिलियन लोगों की मौत हो चुकी है। तथ्य यह है कि हमारे परिणाम इतने बड़े प्रभाव को उजागर करते हैं, जो सीधे तौर पर कोरोना के कारण होता है, यह दर्शाता है कि महामारी कई देशों के लिए कितना विनाशकारी है। 
अध्ययन के मुताबिक अधिकांश देशों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की जीवन प्रत्याशा में अधिक गिरावट आई है। वहीं अमेरिकी पुरुषों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ये गिरावट 2019 की तुलना में 2.2 वर्ष है। कुल मिलाकर, 15 देशों में पुरुषों की जीवन प्रत्याशा में एक साल से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।वहीं 11 देशों में महिलाओं की जीवन प्रत्याशा में कमी देखी गई है।इसकारण पिछले 5.6 वर्षों में मृत्यु दर के मामले में हासिल की गई प्रगति अप्रासंगिक हो गई है। 
अमेरिका में, मृत्यु दर में वृद्धि मुख्य रूप से कामकाजी उम्र के लोगों और 60 से कम उम्र के लोगों में थी, जबकि यूरोप में, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की सबसे ज्यादा मौत हुई।इससे यूरोप में मृत्यु दर में इजाफा दर्ज किया गया।