उज्जैन. हमारे देश में कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जो आश्चर्य का केंद्र हैं, क्योंकि ये मंदिर किसी देवी-देवता का नहीं बल्कि राक्षसों या राक्षस प्रवृत्ति के लोगों के हैं। लेकिन फिर भी लोग यहां श्रृद्धा से सिर झुकाते हैं और परंपराओं का पालन भी करते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं.

शकुनि का मंदिर(
महाभारत युद्ध के प्रमुख कारणों में से एक शकुनि को कौन नहीं जानता। ये गांधार देश के राजा और कौरवों के मामा थे। आज भी शकुनि को एक खलनायक के तौर पर देखा जाता है, लेकिन केरल के कोल्लम जिले में इनका मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में लोग तांत्रिक क्रियाओं के लिए आते हैं।

दुर्योधन मंदिर
केरल के कोल्लम जिले में ही दुर्योधन का भी मंदिर बना हुआ है। ये मंदिर शकुनि के मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। कुरु वंश में जन्म लेने वाले दुर्योधन में राक्षसी प्रवृत्ति थी, लेकिन फिर भी उसका पूजन किया जाता है। इसके अलावा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भी दुर्योधन का एक मंदिर है।

पूतना मंदिर
श्रीमद्भागवत के अनुसार, पूतना एक राक्षसी थी। जब भगवान विष्णु ने कृष्ण रूप में जन्म लिया था, तब कंस ने उन्हें मारने के लिए पूतना को भेजा था। पूतना ने मां के रूप में श्रीकृष्ण को दूध पिलाने के बहाने जहर पिलाने का प्रयास किया था, लेकिन श्रीकृष्ण ने उनका वध कर दिया। गोकुल में आज भी पूतना का एक मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में पूतना की लेटी हुई मूर्ति है, जिस पर कृष्ण छाती पर बैठकर दूध पीते दिखाई देते हैं।

हिडिंबा मंदिर
महाभारत के अनुसार, हिडिंबा महाशक्तिशाली भीम की पत्नी थीं और वो एक राक्षसी थीं। हालांकि उन्होंने राक्षसी होते हुए भी धर्म का साथ दिया था। घटोत्कच हिडिंबा का ही पुत्र था। हिमाचल के मनाली में हिडिंबा का एक मंदिर बना हुआ है और नियमित रूप से उनकी पूजा की जाती है।